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Karnal News: हिंद का प्राण है हिंदी, मेरा अभिमान है हिंदी...

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हिंद का प्राण है हिंदी, मेरा अभिमान है हिंदी...
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कारवाने अदब की सजी महफिल, कवियों और शायरों ने जमाया रंग
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। मानव सेवा संघ में कारवाने अदब की महफिल सजी। जिसमें करनाल व आसपास के क्षेत्र से कवियों, शायरों और साहित्यकारों ने शिरकत की। महफिल के आगाज से पहले सभी ने राष्ट्रगान गाकर देश में भाईचारा कायम होने और सुख-समृद्धि की कामना की। सभी ने प्रण लिया कि हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है हम सभी तथा हर भारतवासी को हिंदी में सभी कार्य करने के लिए प्रेरित करेंगे।

डॉ. एसके शर्मा ने अपनी कविता ‘अजीब लोग हैं बिन बात के देते हैं ताने, झूठी बातों का नहीं जानते कैसा है असर..। अंजु शर्मा ने कहा ‘उस वक्त रवायतें कुछ और थी अंजु, आज उन रवायतों को मानता कौन है..। कवि भारत भूषण वर्मा ने ‘हिंद का प्राण है हिंदी, मेरा अभिमान है हिंदी। भारती मां की वीणा का गूंजता गान है हिंदी।
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कवि हरबंस पथिक ने ‘बेशक खुद से बेखबर रहता हूं..। कवि कमलेश पालीवाल ने हिंदी और उर्दू दोनों ही बहने हैं, दोनों ने ही पहन रखे गहने हैं। कवि सत्पा कोहंड ने कहा गरीबी सब धन की निकल जाएगी, फकीरी सब तन की निकल जाएगी। बहादुर शाह जफर ने कहा मैं एक पुरानी गजल सुना रहा हूं, लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े प्यार में..। कवि महावीर शास्त्री ने कहा ‘रहे अनुराग हिंदी से, लिखूं हिंदी पढूं हिंदी..। कवि जयभारद्वाज ने कहा आसमां सहमा रहा और ये जमीं रोती रही, उस रात जागी बेवफाई और वफा सोती रही। कवि राजीव मल्होत्रा ने ‘उन्होंने मुस्करा कर देखा तो हम होश गवा बैठे, हम होश में आने वाले थे वो फिर मुस्करा बैठे आदि अन्य कई कवियों ने अपनी-अपनी कविताएं सुनाई। रविवार को लगी महफिल की अध्यक्षता कवियत्री जय भारद्वाज ने की। मुख्यातिथि समाजसेवी कावल सिंह विर्क और विशिष्ट अतिथि कवि हरबंस लाल पथिक रहे। आचार्य महावीर प्रसाद शास्त्री ने सभी का मार्गदर्शन किया।
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