संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला नागरिक अस्पताल के स्त्री रोग विशेषज्ञ की ओपीडी के बाहर विश्व उच्च रक्तचाप दिवस मनाया गया। इस दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपा व डॉ. अनीता ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप से मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे मां को हृदय रोग, दौरे, और कोमा का खतरा बढ़ जाता है। वहीं बच्चे को समय से पहले जन्म और यहां तक कि मौत का भी खतरा होता है।
नर्सिंग स्टाफ अनु ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप को दवा और दूसरे उपचारों से नियंत्रित किया जा सकता है हालांकि ज्यादा गंभीर स्थितियों में महिलाओं को अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है या उन्हें डॉक्टर की बारीकी से निगरानी की जरूरत हो सकती है। उच्च रक्तचाप को कभी-कभी साइलेंट किलर भी कहा जाता है क्योंकि अधिकांश लोगों को यह पता ही नहीं चलता कि उनका रक्तचाप उच्च है।
उच्च रक्तचाप के कुछ अन्य संकेत हैं, जिसमें सूजन, सिर दर्द, अचानक वजन बढ़ना, दृष्टि में परिवर्तन, मतली या उलटी, एक बार में थोड़ा सा ही पेशाब करना व पेट में दर्द लक्षणों में शामिल है। उन्होंने बताया कि इसकी अनदेखी करने वाले मरीजों को गंभीर बीमारियों जैसे हृदयघात, मस्तिष्कघात, लकवा, ह्रदयरोग, किडनी का काम करना बंद हो जाना जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा धूम्रपान करना, मोटापा, अत्यधिक शराब का सेवन, अच्छी नींद का न लेना, चिंता, अवसाद, भोजन में नमक का अधिक प्रयोग, गंभीर गुर्दा रोग, परिवार में उच्च रक्तचाप का इतिहास एवं थायराइड की समस्या हाइपरटेंशन का कारण हो सकता है। इस मौके पर पीएमओ डॉ. बलवान सिंह, नर्सिंग अधिकारी कोमलदीप कौर, पुष्पा, रितु, अनु, मनीषा शर्मा, सर्वजीत कौर, खुशबू व करीना मौजूद रही।