माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शिरोमणि अकाली दल (बादल) की हरियाणा इकाई ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने शिअद (बादल) पर एक परिवार के एकाधिकार और सदस्यों के अधिकारों का हनन करने सहित अन्य आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ने का एलान किया है। इसके साथ ही हरियाणा के अकाली नेताओं ने नई पार्टी ‘शिरोमणि अकाली दल हरियाणा स्टेट’ का भी गठन कर दिया है। करनाल स्थित डेरा कार सेवा में एक सम्मेलनके दौरान हरियाणा के अकाली नेताओं द्वारा उक्त एलान किया गया।
सम्मेलन में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य व शिरोमणि अकाली दल के राष्ट्रीय वरिष्ठ उप प्रधान भूपिंदर सिंह असंध, सिरसा से एसजीपीसी सदस्य गुरमीत सिंह तिलोकेवाला, पार्टी महिला विंग की हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष व कुरुक्षेत्र से एसजीपीसी के पूर्व सदस्य बीबी रविंदर कौर, पार्टी के राष्ट्रीय वरिष्ठ उप प्रधान व अंबाला से एसजीपीसी के पूर्व सदस्य सुखदेव सिंह गोबिंदगढ़ और हरियाणा प्रवक्ता कंवलजीत सिंह अजराना मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उनके अलावा प्रदेश के 10 जिलों से अध्यक्षों, उपाध्यक्षों, हल्का प्रधानों और शहरी प्रधानों ने शिरोमणि अकाली दल को छोड़कर शिरोमणि अकाली दल हरियाणा स्टेट की सदस्यता ग्रहण की। साथ ही चुनाव तक नए दल के संचालन के लिए पांच सदस्य कमेटी का भी गठन किया गया।
इस दौरान एसजीपीसी सदस्य भूपिंद्र सिंह असंध ने आरोप लगाते हुए कहा कि बादल परिवार ने परिवारवाद को बढ़ावा देते हुए पार्टी की छवि को खराब किया है। सन 1920 में कुर्बानियां देकर अस्तित्व में आए शिरोमणि अकाली दल को बचाने के लिए ही सभी ने दल को छोड़ने का निर्णय लिया है। पंजाब विधानसभा व लोकसभा सीट के उपचुनाव में पार्टी की दुर्गति के बाद उन्होंने जमीर की आवाज पर यह कदम उठाया है।
उन्होंने कहा कि एसजीपीसी प्रधान का चुनाव करने का अधिकार चयनित सदस्यों को होता है, लेकिन हमेशा उनके अधिकारों का हनन करके बादल समर्थित व्यक्ति को ही प्रधान बनाया जाता है। हालात यह है कि एसजीपीसी के अधीन किसी गुरुद्वारा में यदि किसी सेवादार की भी बदली करनी है तो उसके लिए एसजीपीसी प्रधान से नहीं बल्कि सुखबीर बादल से स्वीकृति लेनी पड़ती है।
करनाल बन सकता है हरियाणा के अकालियों का केंद्र
करनाल। शिरोमणि अकाली दल (बादल) को अलविदा कहने के बाद हरियाणा के अकालियों का केंद्र करनाल बन सकता है। अभी तक जिस तरह के संकेत मिले हैं, उसके मुताबिक नए गठित की गई पार्टी ‘शिरोमणि अकाली दल हरियाणा स्टेट’ का मुख्यालय करनाल को बनाए जाने की तैयारी है। अकाली नेता एवं पदाधिकारी करनाल की धरती पर लिए गए ऐसे फैसलों को शुभ मानते हैं और जीटी बेल्ट के जिलों में करनाल ऐसा जिला है, जो पंजाबी बहुल है। पदाधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2000 में हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का गठन भी करनाल से ही हुआ था। अब शिरोमणि अकाली दल हरियाणा स्टेट के नाम से नई पार्टी के गठन का एलान भी करनाल से ही किया गया है। दो माह बाद नई पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों का चुनाव भी करनाल में ही होगा। राष्ट्रीय वरिष्ठ उपप्रधान भूपिंद्र सिंह का कहना है कि करनाल में ही पंथक एकत्रित होते आए हैं। पूर्व में भी कई फैसले करनाल में लिए गए। पीएसी सदस्य व हरियाणा इकाई के प्रवक्ता कवलजीत सिंह अजराना के अनुसार पंथ के फैसले लेने के लिए करनाल की धरती शुभ मानी जाती है। एसजीपीसी सदस्य गुरमीत सिंह तिलोकेवाला ने कहा कि अब हरियाणा के सिख जागरूक हुए हैं और बादल परिवार के कब्जे से उन्होंने हरियाणा के शिरोमणि अकाली दल को अलग कर लिया है।
दो महीने जिलों में चलेगा सदस्यता अभियान
प्रवक्ता कवलजीत सिंह ने हरियाणा के सभी सिखों से आह्वान किया कि वे एक झंडे के नीचे इकट्ठा होकर शिरोमणि अकाली दल हरियाणा स्टेट को मजबूत करें। उन्होंने बताया कि अगले दो महीनों में सभी जिलों में सिख नेताओं से मिलकर उन्हें नए दल से जोड़ेंगे। इसके लिए सभी जिलों में सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। उसके बाद करनाल में सम्मेलन करके प्रदेश अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों की घोषणा की जाएगी।
अकाल तख्त को समर्पित होगा नया दल
कंवलजीत सिंह का कहना है कि भले ही हरियाणा के सिखों व संगतों के हक के लिए नए दल का गठन किया जा रहा है लेकिन शिरोमणि अकाली दल हरियाणा स्टेट पूर्ण रूप से अकाल तख्त साहिब को समर्पित रहेगा। सिखी या धर्म के फैसले को लेकर सभी हमेशा एकजुट रहेंगे। फिलहाल नए दल के संचालन के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। इसमें बाबा गुरमीत सिंह तिलोकेवाला, भूपिंदर सिंह असंध, सुखदेव सिंह गोबिंदगढ़, इंद्रपाल सिंह करनाल और कंवलजीत सिंह अजराना शामिल हैं।
विस, लोस और एसजीपीसी चुनाव लड़ेंगे
हरियाणा के अकालियों द्वारा गठित की गई नई पार्टी आने वाले लोकसभा, विधानसभा चुनाव के साथ-साथ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) चुनाव भी लड़ेगी। अकाली नेता सुखदेव सिंह गोबिंदगढ़ ने कहा कि हरियाणा के अकाली सबका सत्कार करते हैं मगर कुछ लोग पार्टी को गलत और मनमाने ढंग से चला रहे हैं, हमारी ओर से उनका विरोध है। दूसरा, बरगाड़ी कांड में भी दोषी पूर्व की बादल सरकार को माना जा रहा है, इससे भी पार्टी और उनसे जुड़े लोगों की छवि खराब हुई है। इसके अलावा हरियाणा के अकाली नेताओं की सुनवाई भी अब बहुत ज्यादा नहीं रही। इसी वजह से नेताओं ने पार्टी छोड़ने और हरियाणा की अलग पार्टी बनाने का फैसला किया है। हम हर चुनाव लड़ेंगे और इससे पहले दो माह में पार्टी के संगठन को खड़ा किया जाएगा और सभी पदाधिकारियों की नियुक्तियां सर्वसम्मति से होगी।