विधानसभा चुनाव के दौरान भाईचारा कायम रहे, बिरादरियां न बंटें व जात-पात की राजनीति न हो, इसके लिए समाज में बड़ा दखल रखने वाली खापें अबकी बार कुछ ज्यादा ही सजग और चिंतित हैं। इन खापों का मानना है कि प्रदेश में चल रहे सियासी माहौल के दौरान भाईचारे को नुकसान पहुंचा है, जबकि हरियाणा में 36 बिरादरियों के भाईचारे की मिसाल देशभर में दी जाती रही है।
इसी कारण खापों के प्रतिनिधि व प्रधान सभी दलों को भाईचारे की संस्कृति कायम रखने का कड़ा संदेश दे रहे हैं। साथ ही वे पार्टियों व उनके नेताओं को मुद्दों पर चुनाव लड़ने की नसीहत भी दे रहे हैं। किसान, जवान, खिलाड़ी, बेरोजगारी व आरक्षण कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर खापें खुलकर बात कर रही हैं और इनके लिए आवाज भी बुलंद किए हुए हैं।
उत्तर भारत में करीब 3,500 खाप पंचायतें हैं। इनमें से करीब 190 हरियाणा में हैं। ये खापें सामाजिक व अपनी बिरादरियों में किसी न्यायिक संस्था के रूप में काम करती हैं, पर राजनीति में इनका खासा दखल रहता है। प्रदेश की 40 फीसदी सीटों पर इनका सीधा प्रभाव है, जबकि अन्य सीटों पर भी खापों से जुड़े वोटरों की संख्या ठीक-ठाक है।
इसी कारण सभी पार्टियां खापों का समर्थन पाने की जुगत में जुटी हैं। गांवों में विभिन्न खापों के प्रधानों व प्रतिनिधियों से आशीर्वाद लेने का दौर चल रहा है। सर्वजातीय सर्व खाप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष दहिया कहते हैं िक चुनाव में किसान, महिला सुरक्षा, राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व, पेपर लीक के मामले और अग्निवीर की भर्तियां इस बार प्रमुख चुनावी मुद्दे हैं।
किसान, रोजगार व खिलाड़ियों के मुद्दों पर मुखर
हुड्डा खाप
खिलाड़ियों ने प्रदेश का मान बढ़ाया है। पिछले कुछ महीनों में देखा गया कि उन्हें अपने हक के लिए सड़कों पर संघर्ष करना पड़ा। नेता भी लगातार खिलाड़ियों को निशाना बना रहे हैं। यह उचित नहीं है। कोई भी दल चुनाव जीते, खिलाड़ियों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखे। खिलाड़ियों से बदसलूकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- चौधरी रामफूल, कार्यकारी प्रधान।
दहिया खाप
पिछले कुछ समय से जो सियासी दौर चल रहा है, उसमें सामाजिक ताना-बाना प्रभावित होता दिखा है। चुनाव कोई भी हो, बिरादरियों को बांटने की बात नहीं होनी चाहिए। बात रोजगार, शिक्षा व भाईचारा मजबूत करने की होनी चाहिए। जातिगत समीकरणों को साधकर वोट बटोरने का प्रचलन समाज के लिए अच्छा नहीं है।
- जसपाल, प्रधान
ढांडा खाप
चुनाव सिद्धांतों से लड़े जाने चाहिए। किसी भी सूरत में चुनाव में प्रदेश का भाईचारा खराब न हो। इस बात की खापों में बड़ी चिंता है। सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार होना चाहिए। सरकारें सभी को रोजगार नहीं दे पातीं तो स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जाए। युवाओं को उद्यमी बनाने पर जोर दिया जाए। नेताओं को इस बारे में गंभीरता दिखानी चाहिए।
- देवव्रत ढांडा, अध्यक्ष
नैन खाप
यह सूबा 36 बिरादरियों का है। चुनाव में सभी दल इसका ध्यान रखें कि सियासत का असर भाईचारे पर न पड़े। यह बात हमारे प्रतिनिधि सभी को समझा रहे हैं। इसके साथ-साथ प्रदेश में महिला सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है।
- ईश्वर सिंह, प्रितनिधि
मलिक खाप
सबसे बड़ा मुद्दा है बेरोजगारी और उसके बाद किसानों के मसले। सरकारी स्कूलों में सुविधाएं और शिक्षा का स्तर सुधारना पड़ेगा। सरकारों को ये सुनिश्चित करना होगा कि शहरों के साथ-साथ ग्रामीण स्तर तक स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाएं भी पुख्ता हों।
- दादा बलजीत, प्रधान
कंडेला खाप
किसानों का मुद्दा सबसे प्रमुख है। किसान मुख्य रूप से क्या मांग रहे हैं... केवल अपनी फसल की एमएसपी पर खरीद की गांरटी, इसमें गलत क्या है? क्यों सरकार उनकी इस जायज मांग को स्वीकार नहीं करती? पहलवानों के साथ भी दुर्व्यवहार से खापें बहुत खफा हैं। यह भी इस बार बड़ा चुनावी मुद्दा है।
- ओम प्रकाश, प्रधान