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Karnal News: एच3एन2 का खतरा बढ़ा, तैयारियां शून्य

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अनुज शर्मा
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करनाल। एच3एन2 का खतरा बढ़ रहा है। जींद में एच3एन2 से एक मौत के बाद सभी जिलों को सतर्क किया जा चुका है मगर इससे निपटने के लिए सिविल अस्पताल में तैयारियां शून्य हैं। शनिवार को अमर उजाला की टीम सिविल अस्पताल पहुंची। सुबह 11:20 बजे कमरा संख्या-1ए के बाहर फ्लू ओपीडी लिखा मिला, अंदर दो डॉक्टर बैठे थे। जिन्होंने बताया कि वहां निरोगी स्कीम के तहत ओपीडी चल रही है, फ्लू की नहीं।
11:35 बजे कमरा नंबर-5 की ओपीडी के बाहर मरीजों की कतारें लगी मिली, लेकिन अंदर तीनों डॉक्टर नदारद थे। सुबह 11:45 बजे कमरा नंबर-4 की ओपीडी पहुंचे तो वहां डॉ. कुलबीर सिंह मरीजों को देखते मिले। चार फिजिशियनों में से मात्र एक डॉक्टर ओपीडी में मरीजों को देखते मिले। ऐसे में मरीजों को अस्पताल में भटकना पड़ रहा था। आखिर ऐसे हालात में एच3एन2 के खतरे से कैसे निपटा जाएगा।
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सिविल अस्पताल में बनी अत्याधुनिक लैब सिर्फ एच3एन2 के सैंपल लेने तक ही सीमित है। अस्पताल की लैब में इन्फ्लूएंजा के सैंपलों की जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां लिए गए सैंपलों को जांच के लिए कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज की लैब में भेजना पड़ता है। सैंपल लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से किट ही उपलब्ध कराकर इतिश्री कर ली गई है। डॉक्टरों ने बताया कि सामान्य फिजिशियन, सलाहकार व ईएनटी विभाग की रोजाना की ओपीडी 800 से अधिक है। इनमें से 250 से अधिक मरीज वायरल यानी खांसी, जुकाम व बुखार से पीड़ित पहुंच रहे हैं। जिन्हें डॉक्टर सिर्फ स्लिप पर दवाई लिखकर दे रहे हैं। इनमें से अधिकतर के टेस्ट ही नहीं कराए जाते। संवाद


आइसोलेशन वार्ड में लटके मिले ताले

सिविल अस्पताल के द्वितीय तल पर बने आइसोलेशन वार्ड में ताले लटके मिले। हालांकि एक दिन पहले शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से एन्फ्लूएंजा के खतरे को देखते हुए व्यवस्था दुरुस्त करने के आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन इस दिशा में कोई काम नहीं दिखाई दिया। बीते तीन वर्ष में जिले में स्वाइन फ्लू के आठ पॉजिटिव केस आए थे, इनमें से एक की मौत हो गई थी।

लक्षण
- सिर दर्द, उल्टी, दस्त, खांसी, मांसपेशियों या शरीर में दर्द, बुखार, ठंड महसूस करना, थकान या भरी नाक, गले में खरास।



कारण

फ्लू इन्फ्लूएंजा एक वायरस के कारण होता है। जो नाक, गले और फेफड़ों को संक्रमित करता है। जब बीमार लोग खांसते, छींकते या बात करते हैं तो श्वसन कण हवा में छोड़े जाते हैं, जो आसपास के लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। संक्रमित हाथों से होंठ, आंख या नाक को छूने से भी फ्लू की चपेट में आ सकते हैं।



कोविड के दौरान दी गई हिदायतों का करें पालन

एन्फ्लूएंजा एक वायरल बीमारी है। जो मरीजों के खांसने या थूकने से फैलती है। लोग भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से पहले मास्क लगाएं और सामाजिक दूरी रखें। विशेषकर जो लोग इन बीमारियों से पीड़ित हैं वे घर से कम निकलें। कोविड के दौरान अपनाए गए बचाव के सभी विकल्पों को अपनाएं। तभी इस बीमारी से बचा जा सकता है। टीबी, अस्थमा व छाती रोग से पीड़ित मरीज इस समय सावधानी बरतें।

- डॉ. प्रदीप सिंह, एमओ, टीबी




शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से फ्लू ओपीडी शुरू करने के आदेश जारी किए हैं। जिसके बाद ही संबंधित डॉक्टरों की बैठक लेकर संदिग्ध मरीजों के सैंपलिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। सोमवार तक फ्लू ओपीडी और फ्लू वार्ड तैयार कर लिया जाएगा।
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-डॉ. रेणू चावला, पीएमओ, सिविल अस्पताल, करनाल




स्वाइन फ्लू या इन्फ्लूएंजा की टेस्टिंग का जिम्मा कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज को सौंपा गया है। सिविल अस्पताल में सिर्फ सैंपल लिए जाते हैं। जिन्हें मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। वहीं से रिपोर्ट आने के बाद मरीज का इलाज शुरू किया जाता है।

- डॉ. अनु शर्मा, नोडल अधिकारी, इन्फ्लूएंजा एवं डिप्टी सिविल सर्जन, करनाल
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