करनाल। भाई-बहन हैं, लेकिन किक बॉक्सिंग रिंग में आते ही दायित्व बदलते हैं। बड़ी बहन भव्या अपने छोटे भाई देवांश की कभी गुरु बनती है तो कभी प्रतिद्वंद्वी। भाई हमेशा आगे रहे, देश के लिए पदक लाए। इसी सोच के साथ वह अपने से दो साल छोटे भाई को गुरु बनकर सिखाती भी है।
बड़े मुकाबले के अवसर पर भी वह खुद को पीछे रखकर भाई को आगे बढ़ाने का प्रयास करती है। पुराना सराफा बाजार निवासी अधिवक्ता राजेश भारद्वाज के परिवार में जन्मी भव्या और उसके भाई देवांश ने एक साथ 2018 में किक बॉक्सिंग की शुरुआत की और दोनों के पदकों की संख्या भी बराबर है। हो भी क्यों न जब किसी भाई को सफल बनाने में उसकी बहन का हाथ हो और बहन को कामयाब होते देखना भाई का सपना। दोनों अब तक एक इंटरनेशनल सहित कुल 22-22 पदक जीत चुके हैं।
कक्षा नौ में पढ़ने वाली भव्या बताती है कि अभी तक हर प्रतियोगिता में हम दोनों एक साथ हिस्सा लेने जाते हैं और पदक भी जीत कर लौटते हैं। भाई देवांश के साथ समय बिताना बहुत अच्छा लगता है। जब भाई देवांश गलती करता है तो मैं उसे किसी कोच के तौर पर अच्छे से समझाती हूं। सुबह पांच बजे उठकर दोनों ही खेल का अभ्यास करते हैं। फिर एक साथ स्कूल चले जाते हैं। स्कूल से लौटने के बाद शाम को पांच बजे फिर खेल अभ्यास में जुट जाते हैं। भाई के साथ अभ्यास करने का एक फायदा भी है। हालांकि हर बहन रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर अपनी सुरक्षा का वादा लेती है, लेकिन उस बहन का गौरव तब और बढ़ जाता है जब बहन ही भाई को रक्षक बनाने में अपना योगदान दे रही हो। ब्यूरो