- पार्श्वनाथ भगवान के जन्म कल्याणक के उपलक्ष्य में हुई एक शाम प्रभु पार्श्व के नाम भजन संध्या
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जैन परंपरा के 23वें तीर्थंकर श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान के जन्म कल्याणक के उपलक्ष्य में एक शाम प्रभु पार्श्व के नाम भजन संध्या आयोजित की गई। तीर्थस्थल श्री आत्म मनोहर जैन आराधना मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में संत गौरव पीयूष मुनि महाराज ने कहा कि महापुरुष सूर्य और चंद्रमा से बढ़कर होते हैं जो भूलोक से प्ररायण करने के उपरांत अपने ज्ञान की रोशनी मानव मात्र के लिए प्रकाश स्तंभ के रूप में छोड़ जाते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ जैन परंपरा के 23वें तीर्थंकर हैं, जिनका संबंध वाराणसी ( काशी ) के इक्ष्वाकुवंशीय राजपरिवार से है। राजा अश्वसेन तथा महारानी वामादेवी के आत्मज भगवान पार्श्वनाथ आज से 2900 वर्ष पूर्व पौष कृष्ण दशमी को इस धराधाम पर अवतरित हुए थे, जिन्होंने 30 वर्ष की अवस्था में आत्म कल्याण एवं जनहित के लिए संयम साधना का पथ अंगीकार किया था। उन्होंने चातुर्मास धर्म के अंतर्गत अहिंसा, सत्य, अचौर्य तथा अपरिग्रह का उपदेश दिया और साधु- साध्वी, श्रावक-श्राविका के रूप में चार प्रकार के तीर्थ की स्थापना की।
पद्मावती संगीत समूह के भजन गायक अरुण जैन ने- प्रभु देने वाले हैं हम लेने वाले हैं आज खाली हाथ नहीं जाना, पार्श्व प्रभु जी सुन लेना एक सवाल दीवाने का, अगर समझ में आ जाए तो भक्तों को समझा देना और किसने सजाया तेरा भवन बड़ा प्यारा लागे बड़ा सोहना लागे आदि भजनों से सभी को भावविभोर कर भक्ति रस से सराबोर कर दिया। अध्यक्षता नवीन जैन ने की। झंडा फहराने की रस्म प्रधान अशोक जैन मुलाना ने निभाई। प्रभु पार्श्व दरबार का अनावरण समाजसेवी पुनीत जैन ने किया। लंगर की सेवा जैन एंड कंपनी प्रॉपर्टीज करनाल की ओर से, अल्पाहार का प्रबंध जैन सभा घरौंडा के प्रधान राजेंद्र जैन की ओर से रही। समारोह में विशेष रूप से भाजपा जिलाध्यक्ष योगेंद्र राणा, पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा, जिला परिषद चेयरमैन सोहन सिंह राणा आदि सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।