करनाल। केंद्र सरकार की ओर से बीपीएल परिवारों को सरकारी एवं निजी अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक की निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से आयुष्मान भारत योजना शुरू की गई थी। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए साढ़े चार साल पहले जिला स्तर पर आयुष्मान मित्र के लिए भर्ती की गई थी। इसमें करनाल के सिविल अस्पताल में चार, असंध में दो और नीलोखेड़ी में एक आयुष्मान मित्र रखा गया। काफी समय से इन आयुष्मान मित्रों को समय पर मानदेय नहीं मिल रहा है इससे उनमें रोष है।
आयुष्मान मित्र अर्शदीप, मुकेश, रेखा और पुरुषोत्तम ने बताया कि सरकार की ओर से उन्हें गरीब लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाने से लेकर सरकारी व निजी अस्पतालों में सरकार की ओर मिलने वाले लाभ के सारे बिलों का सत्यापन करवाने तक का सारा कार्य उन्हें करवाना पड़ता है। वहीं सरकार की ओर से उन्हें इस कार्य के बदले सिर्फ प्रति माह पांच हजार रुपये का ही मानदेय दिया जा रहा है जो सम्मानजनक नहीं है और समय पर नहीं मिलता। इससे उनमें काफी रोष है। मानदेय नहीं मिलने के विरोध में वे पिछले पांच दिनों से हड़ताल पर बैठे है। इससे आयुष्मान कार्ड बनाने व बिल चेक करने कार्य अटका पड़ा हुआ है। आयुष्मान मित्रों का कहना है कि वे पिछले चार सालों से वे कई बार सिविल सर्जन करनाल और पंचकुला में अधिकारियों को पत्र दे चुके है लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन देकर उन्हें टाल दिया जाता है। अब उन्हें धरने पर बैठे हुए 15 दिनों से अधिक समय बीत चुका है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए डाटा एंट्री ऑपरेटर लगाए हैं। उन्होंने सरकार से मानदेय दिलाने की मांग की है।