इंद्री। रात के वक्त पूरा परिवार गहरी नींद में था, लेकिन अचानक ही कुछ दरकते की आवाज पर नींद टूटी। देख कि मकान की छत गिरने को हो रही थी। कमरे में चारों तरफ पानी ही पानी था। बचाने के लिए आवाज लगाई तो खुद बाढ़ के चलते परेशानी से जूझ रहे पड़ोसियाें ने मशक्कत के बार घर से बाहर निकाला। इतने में छत गिर पड़ी। अपने हालात बयान करते वक्त मरम्मत के लिए पैसे नहीं होने की बात कहते हुए गफ्फूर फफक पड़ा।
गुरबत और हालात से बेबस गफ्फूर दिन में कई बार बस अपने घर को लगातार तकते रहते हैं। उन्हाेंने बताया कि कि सरकार की ओर से अब तक कोई सहायता नहीं मिली है। हालात पहले ही ज्यादा खराब हो गए हैं। जीवन भर की मजदूरी के सहारे एक मकान बनाया था, वह भी बाढ़ ने छीन लिया। उन्हाेंने बताया कि पड़ोसियों ने अपने घर में सहारा दिया है। जैसे ही पानी उतरेगा तो मकान की मरम्मत की समस्या सामने खड़ी हो जाएगा। मरम्मत के लिए पैसा कहां से आएगा, यह सोचकर घबराहट होती है। सरकार से मांग है कि मदद की जाए। संवाद
सरकार ने भेजा एक्सपायरी डेट का दूध
ग्रामीण जिंदा हुसैन ने बताया कि खाना बनाने के लिए रखीं लकड़ियां पानी में बह गई थी। गैस सिलेंडर भरवाने के लिए शहर जाना था, लेकिन बाढ़ की वजह से रास्ते कटने के कारण सिलिंडर नहीं भरवा सके सके। बड़ी मुश्किल से ट्रैक्टर ट्रॉली में सिलिंडर भरवाने के लिए इंद्री जा रहे हैं। सरकार की ओर से कोई सहायता नहीं मिल रही है। बीते मंगलवार चार गांवों के लिए केवल आठ लीटर दूध भेजा गया था, वह भी एक्सपायरी डेट का था। जिसे ग्रामीणों ने वापस कर दिया।
परिवार से पांच दिन तक नहीं मिल पाया राजू
जपती छपरा निवासी राजू ने बताया कि वह अंबाला में ट्रक चलाता है। करीब पांच दिन पूर्व उसे बाढ़ का पता चला तो अपने परिवार से मिलने के लिए गांव आ गया, लेकिन रंदौली पार करते ही चारों तरफ पानी ही पानी था। प्रशासन की ओर से कोई भी नाव की व्यवस्था नहीं होने के कारण वापस इंद्री जाना पड़ा। ढाबे पर ठहराना पड़ा। पांच दिन पर गुजारने के बाद वीरवार को घर पहुंच सके। यदि प्रशासन की ओर से नाव की व्यवस्था होती तो वह समय से अपने परिवार के पास पहुंच जाते।