करनाल। प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेजों को राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत डीआरटीबी यानी ड्रग प्रतिरोधी टीबी का नोडल सेंटर बनाया गया है। इसमें बीपीएसएमसी खानपुर, सोनीपत, केसीजीएमसी करनाल, पीजीआईएमएस रोहतक व एसएचकेएम मेवात मेडिकल कॉलेजों को शामिल किया गया। इसमें खानपुर को चार, करनाल व मेवात को पांच-पांच और रोहतक को आठ जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। प्रत्येक नोडल सेंटर में पल्मोनरी मेडिसन विभाग से एक विशेषज्ञ की नियुक्ति की गई है।
कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज से कम्युनिटी मेडिसन से डॉ. गौरव कांबोज ने बताया कि डीआरटीबी नोडल सेंटर के विशेषज्ञ अपने से संबंधित जिलों में मिलने वाले गंभीर टीबी के मरीजों को ठीक करने में डॉक्टरों की मदद करेंगे। इसके साथ-साथ टीबी में आ रहे नए बदलावों के बारे में संबंधित जिलों के डॉक्टरों व स्टाफ को ट्रेनिंग देंगे।
जल्द ही सभी मेडिकल कॉलेज अपने से संबंधित जिलों के नोडल अधिकारियों, डॉक्टरों सहित संबंधित स्टाफ की एक बैठक आयोजित की जाएगी, जिससे विशेषज्ञ अपने क्षेत्र में आने वाले डॉक्टरों व उनकी टीम से रूबरू हो सकें। बीपीएसएमसी खानपुर, सोनीपत में पल्मोनरी मेडिसन के विभागाध्यक्ष एवं प्रो. डॉ. आनंद अग्रवाल, केसीजीएमसी करनाल में पल्मोनरी मेडिसन के सहायक प्रो. डॉ. कपिल चलीना, पीजीआईएमएस रोहतक में पल्मोनरी मेडिसन के प्रो. डॉ. विपिन गुप्ता व एसएचकेएम मेवात में पल्मोनरी मेडिसन के प्रो. विपिन गोयल को नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। संवाद
किस मेडिकल कॉलेज को कहां की जिम्मेदारी
बीपीएसएमसी खानपुर, सोनीपत - पानीपत, सोनीपत, कैथल व जींद।
केसीजीएमसी करनाल - अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला व यमुनानगर।
पीजीआईएमएस रोहतक - भिवानी, चरखी दादरी, फतेहाबाद, हिसार, झज्जर, रेवाड़ी, रोहतक व सिरसा।
एसएचकेएम मेवात - फरीदाबाद, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, मेवात व पलवल।
मेडिकल कॉलेजों को डीआरटीबी का नोडल सेंटर बनने से गंभीर टीबी से पीड़ित मरीजों को लाभ मिलेगा, क्योंकि जिन मरीजों की लंबे से समय से टीबी ठीक नहीं पा रही है। वे अब मेडिकल कॉलेजों में अपना इलाज करवा सकेंगे। - डॉ. एमके गर्ग, निदेशक, केसीजीएमसी, करनाल।