महिला थाना प्रभारी कविता गोयत अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग खिलाड़ी हैं। वह बताती हैं कि उनके भाई भी बाॅक्सर हैं, अक्सर भाई को खेलते देखा तो मन जागा कि भाई जैसा बनना है लेकिन परिवार ने मना किया और कहा कि लड़की होकर बॉक्सिंग करेगी। जब सपने की शुरुआत की तो घुटनों में गंभीर चोट लग गई थी जिसकी वजह से सपने टूटते दिखे। चोट के बाद चिकित्सक ने खेलने से मना कर दिया था लेकिन रोज स्टेडियम में जाकर अन्य खिलाड़ियों को देखा करती थीं। घुटनों की सर्जरी होनी थी जिसके लिए पैसे भी नहीं थे, आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण इलाज भी लंबा चला। लेकिन कोच अनुप कुमार ने निशुल्क इलाज करवाया और बॉक्सिंग के लिए प्रेरित किया। देश के लिए वर्ष 2008 में अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में रजत पदक, 2009 में इंटोरएशियन गेम में कांस्य पदक जीता। इसके अलावा साल 2011 में उन्हें भीम अवार्ड से सम्मानित किया गया। वह कहती है कि खेल की दुनिया से कानूनी क्षेत्र में कदम रखना उनके सफलता रही हैं।