माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। हाईकोर्ट के आदेश पर सेक्टर-32 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की करोड़ों की जमीन पर अनधिकृत रूप से काबिज झोपड़ियों में रह रहे परिवारों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिसके तहत सोमवार को एचएसवीपी ने इन परिवारों को सेक्टर-14 पार्ट-2 में बने 264 फ्लैट आवंटित कर दिए हैं। एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक की मौजूदगी में ड्रॉ पद्धति से परिवार के मुखिया को अलग- अलग लोगों से पर्चियां निकलवाकर फ्लैट नंबर आवंटित किए गए। जिससे पिछले कई वर्षों से झुग्गियों में जिंदगी व्यतीत कर रहे लोगों के होठों पर मुस्कुराहट आ गई।
सेक्टर-32 में एचएसवीपी की करोड़ों रुपये की सैकड़ों एकड़ जमीन है, वहां एचएसवीपी ने प्लॉट आवंटित किए थे, जहां आलीशान कोठियां बन चुकी हैं, लेकिन इसी बीच बिहार, यूपी, राजस्थान आदि कई राज्यों से आए अधिकांश प्रवासी मजदूरों आदि ने झोपड़ियां डालकर रहना शुरू कर दिया। अब वहां एक बड़ी बस्ती बन चुकी है। जिसे कई नोटिस देने के बाद भी ये परिवार खाली नहीं कर रहे हैं। उधर, कोठियों के मालिकों को अपनी आलीशान कोठियों के आगे ये झोपड़-पट्टियां बदनुमा दाग जैसी लग रही हैं। उन्होंने न्यायालय की शरण ली तो न्यायालय ने अनधिकृत भूमि को खाली कराने के आदेश दिए।
सात सितंबर को सुनवाई है, जिसमें एचएसवीपी को न्यायालय में जवाब देना है। इसलिए सोमवार को एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक पंचकूला धर्मबीर की मौजूदगी में संपदा अधिकारी दीपक घणघस, मुख्य अभियंता डीके आहूजा, कार्यकारी अभियंता धर्मबीर मेहला की मौजूदगी में एचएसवीपी के भीम सिंह की अगुवाई में लाटरी पद्धति से ड्रॉ किया। ड्रम के एक खाने में नाम और दूसरे में प्लॉट नंबर की पर्चियां डाली गईं। इन्हीं परिवारों में से अलग-अलग लोगों को बुलाकर पर्चियां निकालकर 264 फ्लैट आवंटित कर दिए। उन्हें दो तीन दिनों में अलॉटमेंट लेटर दे दिए जाएंगे।
जमा करनी होगी किश्त
30 दिन के अंदर अभिलेख व किस्त जमा करनी होगी। प्रत्येक आवंटी को 500 रुपये प्रति माह 20 वर्षों तक किस्त देनी होगी। कुल 1.20 लाख रुपये में फ्लैट मिल जाएगा। ये फ्लैट अपना आशियाना के तहत बनाए गए थे, पहले तो इन्हें वाल्मीकि बस्ती के लोगों को आवंटित किया था, लेकिन उन्होंने फ्लैट लेने से इनकार कर दिया तो अब इन फ्लैट को सेक्टर-32 के परिवारों को आवंटित कर दिया है। 2020 में किए सर्वे में यहां 341 परिवार बताए गए थे, लेकिन फ्लैट 264 ही होने के कारण 77 लोग फ्लैट लेने से वंचित रह गए हैं, लेकिन उन्हें भी भूमि खाली करके अन्यत्र जाना होगा।