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Karnal News: कृषि में मिट्टी और पानी के गुणात्मक सुधार पर जोर

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। अफ्रीकी-एशियाई ग्रामीण विकास संगठन (एएआरडीओ) की ओर से केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) करनाल में चल रहे अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण का शनिवार को समारोहपूर्वक समापन किया गया। इसमें कृषि में खराब गुणवत्ता वाले पानी का उपयोग पर मंथन किया गया।
बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे एएआरडीओ के सेक्रेटरी जनरल डॉ. मनोज नरदेव सिंह ने कहा कि जब भी हमने खराब गुणवत्ता वाले पानी के प्रबंधन की बात की तो इसके प्रभावी प्रबंधन के लिए न केवल पानी बल्कि फसल, मिट्टी और जलवायु पर भी विचार किया। दुनिया के कई देशों के वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों ने जो यहां तकनीक, प्रौद्योगिकी सीखी है, इसका उपयोग करके अपने देश की मिट्टी व पानी में गुणात्मक सुधार कर सकेंगे। सभी प्रशिणार्थियों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किए गए।
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उन्होंने बताया कि एएआरडीओ अफ्रीका के 18 और एशिया के 14 सहित कुल 32 देशों का एक समूह है, जो मुख्य रूप से विभिन्न क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से अपने सदस्य देशों के लिए ग्रामीण विकास के क्षेत्र में काम कर रहा है। इस प्रशिक्षण में एएआरडीओ के सदस्य देश बांग्लादेश, श्रीलंका, मॉरीशस, केन्या, जाम्बिया, जॉर्डन और एस्वातिनी के नौ प्रतिनिधियों ने भाग लिया है, जिनमें खराब गुणवत्ता वाले भूजल और नमक प्रभावित मिट्टी की समस्या थी।
आईसीएआर के उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. एसके चौधरी ने कहा कि लवणीय, क्षारीय जल के अलावा औद्योगिक, सीवरेज प्रदूषित जल आदि कई अन्य तरह से प्रदूषित हो रहे जल की भी सिर्फ भारत या एएआरडीओ सदस्य देशों की ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में समस्या बढ़ रही है। आने वाले समय में जल प्रदूषण और बढ़ेगा, इसलिए निम्न गुणवत्ता वाले जल के कृषि में उपयोग बेहतर समाधान हो सकता है।
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सीएसएसआरआई, करनाल के निदेशक डॉ. आरके यादव ने मुख्य अतिथि, सम्मानित अतिथि और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से एएआरडीओ सदस्य देशों के बीच वैज्ञानिक ज्ञान साझा करने और सामाजिक-सांस्कृतिक आदान-प्रदान के महत्व को संक्षेप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सीएसएसआरआई क्षमता निर्माण कार्यक्रमों से परे एएआरडीओ सदस्य देशों के साथ अनुसंधान कार्यक्रमों के विस्तार पर कड़ी मेहनत कर रहा है। पाठ्यक्रम सह-निदेशक और प्रमुख मृदा फसल प्रबंधन डॉ. एके राय, पाठ्यक्रम निदेशक और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गजेंद्र, केन्या से गॉर्डन ओचिएंग न्याकिती और बांग्लादेश से कमरुल हसन ने प्रशिक्षण कार्यक्रम पर विचार साझा किए। संचालन वैज्ञानिक अवनी ने किया। प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. निर्मलेंदु बसाक, ,डॉ. आरके फगोड़िया आदि कई लोग मौजूद रहे।
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