फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अधिक ताप सहने वाली गेहूं की प्रजातियां इजाद करने पर जोर

विज्ञापन
विज्ञापन
करनाल। पिछले साल गेहूं की बुवाई के समय करीब 40 डिग्री सेल्सियस तापमान अप्रत्याशित था। जिसने देश के फसल शोधकर्ताओं को भी हैरान कर दिया था, लेकिन भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) करनाल के वैज्ञानिकों को इसका आभास करीब एक दशक पहले ही हो गया था। यही कारण है कि उन्होंने पिछले एक दशक में कई ऐसी गेहूं की प्रजातियों को रिलीज किया, जिन्होंने अधिक तापमान सहकर भी बेहतर उत्पादन दिया। इसमें डीबीडब्ल्यू 187 व डीबीडब्ल्यू 303 सबसे प्रमुख हैं।
विज्ञापन

आईआईडब्ल्यूबीआर के प्रमुख अन्वेषक (फसल सुधार) डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि गेहूं की अगेती बुवाई 25 अक्तूबर से और सामान्य बुवाई एक नवंबर से मानी जाती है। गेहूं बुवाई के समय सामान्य तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस तक होता है। हालांकि गेहूं बुवाई के लिए सबसे बेहतर तापमान 22 से 25 डिग्री सेल्सियस तक माना जाता है। पकते समय तापमान 34 से 35 डिग्री के बीच रहता है, लेकिन पिछले साल गेहूं की बुवाई के समय तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक चला गया था। यह अप्रत्याशित तापमान था, किसानों के पास डीबीडब्ल्यू 187 व डीबीडब्ल्यू 303 उपलब्ध थी। यह देखा गया है कि इन दोनों प्रजातियों ने तापमान में अप्रत्याशित बढ़ोतरी के बावजूद शानदार प्रदर्शन किया है। इसके अलावा संस्थान ने कई ऐसी प्रजातियां पिछले एक दशक के दौरान दी हैं, जिनमें तापमान सहन करने की क्षमता है, लेकिन पिछले साल के अप्रत्याशित तापमान को देखते हुए शोध कार्य में इसे शामिल किया गया है। कई ऐसी प्रजातियों पर शोध किया जा रहा है, जिनमें तापमान की सहनशीलता अधिक होगी।
रात का तापमान अधिक अहम
डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि गेहूं में पकते समय दिन के तापमान (टर्मिनल हीट) से इतना फर्क नहीं पड़ता, जितना रात के तापमान से पड़ता है। यदि दिन का तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस के करीब रहता है तो ये माना जाता है कि रात का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस के करीब रहेगा। यही कारण है कि अगेती बुवाई की सलाह दी जाती है, क्योंकि फसल में दाना बनने के बाद तापमान बढ़ता है तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, लेकिन दाना बनने से पहले दूध की स्थिति में तापमान बढ़ता है तो वह सूख सकता है, जिसका सीधा प्रभाव फसलोत्पादन पर पड़ता है, इसलिए रात का तापमान बेहद अहम माना जाता है।
विज्ञापन

तापमान औसत रहने की संभावना
इस बार गेहूं बुवाई के समय तापमान औसतन रहने की संभावना है, लेकिन इसे मजबूती के साथ नहीं कहा जा सकता है। डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि मौसम हमेशा एक जैसा नहीं रहता है। बहुत कम ही ऐसा होता है कि पिछले साल के निर्धारित समय पर मौसम दोहराव करे।
दो और प्रजातियां किसानों को होंगी उपलब्ध
प्रमुख अन्वेषक (फसल सुधार) डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि किसानों को डीबीडब्ल्यू 187 व डीबीडब्ल्यू 303 के साथ-साथ दो और किस्मों की बुवाई की सलाह दी गई है। इनमें डीबीडब्ल्यू 327 व डीबीडब्ल्यू 332 शामिल हैं। इन प्रजातियों को पिछले साल रिलीज किया जा चुका है। इन प्रजातियों के बीज को संस्थान द्वारा इस वर्ष किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें