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Karnal News: फर्जी एमएलआर के लिए 28 हजार की रिश्वत लेते चिकित्सक गिरफ्तार

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फर्जी एमएलआर के लिए 28 हजार की रिश्वत लेते चिकित्सक गिरफ्तार
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फर्जी एमएलआर के लिए 28 हजार की रिश्वत लेते चिकित्सक गिरफ्तार
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गलत मेडिकल देकर पहले एक पक्ष से वसूले थे रुपये, फिर दूसरे पक्ष से भी की थी मांग, तभी चढ़ा हत्थे
आज कोर्ट में पेशी के बाद आरोपी चिकित्सक को रिमांड पर लेकर की जाएगी पूछताछ
सीएचसी निसिंग के मेडिकल अफसर के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने की कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
निसिंग। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निसिंग के मेडिकल अफसर को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने मंगलवार को 28 हजार रुपये रिश्वत के साथ रंगेहाथ पकड़ा। मेडिकल अफसर ने मेडिको लीगल रिपोर्ट में फ्रैक्चर दिखाने के लिए शिकायतकर्ता से 30 हजार रुपये की मांग की थी। इसके बाद शिकायत के आधार पर ब्यूरो की टीम ने मेडिकल अफसर को 28 हजार रुपये के साथ गिरफ्तार किया है। बुधवार को कोर्ट में पेश करने के बाद आरोपी चिकित्सक को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।
निसिंग में दो पक्षों के बीच विवाद के बाद मारपीट हो गई थी। मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर ने मिलीभगत से एक पक्ष की मेडिकल रिपोर्ट में फ्रैक्चर दिखा दिया जबकि कोई चोट नहीं थी। मेडिको लीगल रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने धारा-326 के तहत केस दर्ज कर लिया। इसके बाद दूसरा पक्ष भी आरोपी डॉ. विकास गर्ग के पास पहुंचा। उन्होंने डॉक्टर से कहा कि दूसरे पक्ष को इतनी चोट ही नहीं आई, जितनी रिपोर्ट में दिखाई गई है। इस पर डॉ. विकास गर्ग ने कहा कि अगर तुम्हें भी फ्रैक्चर दिखाना है तो 30 हजार रुपये लगेंगे, जिसके बाद 28 हजार रुपये में बात तय कर उसने इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को दी।
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शिकायत पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निसिंग पहुंची। टीम ने पीड़ित को 28 हजार रुपये लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल अफसर डॉ. विकास गर्ग के पास भेजा। इन नोटों के सीरियल नंबर नोट करने के साथ ही इन पर सफेद पाउडर भी लगाया गया था। शिकायतकर्ता रिश्वत की रकम लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंदर पहुंचा और जैसे ही डॉ. विकास गर्ग ने रिश्वत ली, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने उन्हें धर दबोचा।
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दो पक्षों में विवाद हुआ था। एक पक्ष से डॉक्टर ने रिश्वत लेकर फर्जी एमएलआर बनाई थी। इसके आधार पर पुलिस ने दूसरे पक्ष पर मामला दर्ज कर लिया था। इसके बाद डॉक्टर ने दूसरे पक्ष की फर्जी एमएलआर के लिए भी रिश्वत मांगी, जिसकी शिकायत पर कार्रवाई कर डाॅक्टर को गिरफ्तार किया गया है।
- सचिन कुमार, इंस्पेक्टर, भ्रष्टाचार निरोध ब्यूरो
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