करनाल। नवरात्र पर जब समाज शक्ति और मातृत्व की पूजा करता है, उसी शक्ति का सजीव उदाहरण हैं शिक्षिका विजय लक्ष्मी। पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने हार न मानकर शिक्षा और खेल के क्षेत्र में पहचान बनाई है। शिक्षक के साथ वह राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज हैं। विजय लक्ष्मी पंडित चिरंजीलाल शर्मा महाविद्यालय में कॉमर्स विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि वह बचपन से ही पढ़ने में अच्छी थीं साथ ही खेलों में भी शाैक रहा है। तीन साल की उम्र में पोलियो का खराब टीका लगाने के कारण पैर दिव्यांग हो गए। यह जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष था, लेकिन उन्होंने इसे कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने बताया कि बचपन में मां गोद में लेकर स्कूल छोड़ने जाया करती थी जिससे कभी-कभी निराशा भी होती थी लेकिन माता-पिता के मजबूत सहारे से कमजोरी को ताकत बनाने का अवसर मिला। उनकी माता सुनीता देवी और पिता रामेश्वर नंद हमेशा से चाहते थे कि बेटी शिक्षा के क्षेत्र में अपना पेशा बनाएं। विजय लक्ष्मी राष्ट्रीय व राज्य स्तर की पैराशूटिंग खिलाड़ी हैं। 10 मीटर एयर पिस्टल में अपनी पहचान बनाई है।