- मरीजों का आरोप, बुखार ठीक न होने के बावजूद पकड़ा रहे छुट्टी की पर्ची
- जिले में रोजाना आ रहे 8 से 10 केस, आंकड़ा 209 पर पहुंच चुका
अनुज शर्मा
करनाल। जिले में डेंगू मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। दूसरी तरफ जिला नागरिक अस्पताल के डॉक्टर डेंगू वार्ड में भर्ती मरीजों का अधूरा इलाज कर उन्हें घर भेज रहे हैं। जिन मरीजों का इलाज पूरा हो जाता है, उनके हाथ में लगे कैनूला को निकालने के बाद नर्सिंग अधिकारी की ओर से भी रक्त का बहाव रोकने के लिए पर्याप्त रूई मरीज को उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। इन अव्यवस्थाओं से मजबूर मरीज व उनके तीमारदार घर लौट रहे हैं।
यही नहीं, डेंगू वार्ड में भर्ती मरीजों का आरोप है कि डॉक्टरों की ओर से उन्हें बताया जा रहा है कि डेंगू वार्ड में सिर्फ उन्हीं मरीजों को भर्ती किया जाएगा जिनकी प्लेटलेट्स 20 हजार पर आ चुकी है लेकिन आपकी तो 65 हजार प्लेटलेट्स हैं। ऐसे में आपको छुट्टी दी जा रही है। वहीं बुखार से तड़प रही एक महिला मरीज को भी बुखार न टूटने के बावजूद उसकी छुट्टी की पर्ची बनाकर उसके हाथ में थमा दी गई। संवाद
शिकायत मिलने पर डिप्टी ने किया अस्पताल का दौरा
नागरिक अस्पताल के डेंगू वार्ड की शिकायत किसी ने स्वास्थ्य विभाग के डेंगू के जिला नोडल अधिकारी को कर दी। इसके बाद उन्होंने तत्काल नागरिक अस्पताल के पीएमओ को फोन पर जानकारी ली और दोपहर बाद डेंगू वार्ड का दौरा किया। वहीं संबंधित अधिकारियों को मरीजों के हित में निर्देश देते हुए कहा कि डेंगू वार्ड के अलावा सभी दाखिल मरीजों के बेडों पर मच्छरदानी हो। किसी मरीज को अपनी स्थिति नाजुक लग रही है तो उसे एक दिन बाद छुट्टी दी जाएगी। वहीं सभी वार्डों में मच्छर को भगाने के लिए क्वाइल या ऑलआउट का उपयोग किया जाए।
बुखार नहीं टूट रहा, डॉक्टर ने दे दी छुट्टी : सोनिया
मरीज सोनिया ने बताया कि वह 18 अक्तूबर को अस्पताल में दाखिल हुई थी। तब से उसका बुखार कभी चढ़ जाता है तो कभी उतर जाता है। वहीं शरीर में दर्द है। ऐसे में बिना ठीक किए डॉक्टर ने उन्हें छुट्टी का पर्चा थमा दिया।
रिपोर्ट आने से पहले किया डिस्चार्च : शुभम
मरीज शुभम ने बताया कि वह 21 अक्तूबर को डेंगू वार्ड में भर्ती हुआ था। वह दर्द, बुखार व सर्दी से कांप रहा था। 22 अक्तूबर की सुबह नर्स ने उसका सैंपल लेकर लैब में भेजा है। रिपोर्ट आने से पहले डॉक्टर ने उसकी छुट्टी कर दी।
रुपये होते तो प्राइवेट में करा लेते इलाज : हरविंद्र
मरीज हरविंद्र ने बताया कि वे गरीब हैं। ऐसे में वे सरकारी अस्पताल में पड़े हैं। अगर उनके पास इलाज कराने के लिए रुपये होते तो किसी प्राइवेट अस्पताल में जाकर इलाज करा लेते लेकिन यहां पर मरीजों की कोई सुनता तक नहीं है।
अगर किसी भी मरीज को डॉक्टर व अन्य स्टाफ संबंधी कोई शिकायत है तो वह पीएमओ कार्यालय में आकर उक्त की शिकायत कर सकता है। जिस पर तुरंत प्रभाव से कार्रवाई की जाएगी। मरीजों को दाखिल करना व छुट्टी करना संबंधित डॉक्टर का कार्य है।
- डॉ. दीपक गोयल, प्रवक्ता, जिला नागरिक अस्पताल, करनाल