भारतीय ओलंपिक संघ (आईओसी) ने 21 फर्जी खेल महासंघों की सूची खेल मंत्रालय को भेजी हैं। केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री अनुराग ठाकु र को पत्र लिखकर इन सभी फर्जी संघों पर जल्द प्रतिबंध लगाने की मांग की है। वहीं केंद्रीय खेल मंत्रालय से खिलाड़ियों को इन संघों से दूर रखने के लिए जागरूक करने की भी मांग की गई है। संघ का कहना है कि पूरे देश के साथ-साथ इनमें से कई संस्थाएं हरियाणा में भी सक्रिय हैं।
भारतीय ओलंपिक संघ (आईओसी) के संयुक्त सचिव मधु कांत पाठक ने 29 जनवरी को खेल मंत्रालय को भेजे पत्र में लिखा है कि देश और प्रदेश में कई फर्जी खेल महासंघ और खेल संगठन बनाए गए हैं, ये संस्थाएं खिलाड़ियों के पैसों की हेराफेरी कर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। भारतीय ओलंपिक संघ के पास धोखाधड़ी के कई मामले और शिकायतें आ चुकी हैं। इसलिए इन पर शीघ्र रोक लगाई जाए। उन्होंने लिखा है कि इस प्रकार के चिन्हित संगठनों की सूची में भारतीय महिला ओलंपिक संघ, ग्रामीण ओलंपिक संघ भारत, भारतीय ग्रामीण ओलंपिक संघ, छात्र ओलंपिक संघ, भारतीय स्कूल ओलंपिक संघ, ग्रामीण खेल संघ, भारतीय ग्रामीण खेल संघ, भारत के ग्रामीण खेल संगठन, राष्ट्रीय स्कूल खेल संघ शामिल हैं।
इसके अलावा संघ संगठन जैसे, इंडियन वूमेन ओलंपिक एसोसिएशन, इंडिया, स्कूल स्पोर्ट्स एंड कल्चरल एक्टिविटीज फेडरेशन, नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, यूथ गेम्स फेडरेशन इंडिया, यूथ स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, यूथ स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फाउंडेशन, द एसोसिएशन फॉर ट्रेडिशनल यूथ गेम्स एंड स्पोर्ट्स इंडिया, साल्वो स्पोर्ट्स एंड गेम्स फेडरेशन इंडिया, स्टूडेंट गेम्स और स्पोर्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, स्टूडेंट गेम्स एंड स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, स्टूडेंट गेम्स एंड एक्टिविटी फेडरेशन और स्टूडेंट गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। यह पत्र केंद्रीय खेल मंत्रालय सहित सभी राज्यों और जिला ओलंपिक संघों को भी भेजा गया है ताकि वे अपने क्षेत्र के सभी खिलाड़ियों को इस प्रकार के खेल संघों के चक्कर में पड़ने से बचा सकें
निशाने पर नवोदित खिलाड़ी
फर्जी खेल संघ नवोदित खिलाड़ी को निशाना बनाते हैं। ऐसे खिलाड़ी स्कूलों और स्टेडियमों में मिल जाते हैं। फर्जी खेल संगठन से जूडे़ पदाधिकारी उन्हें प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में हिस्सा दिलाने के नाम पर गुमराह करते हैं। इस फर्जीवाडे़ से अनजान खिलाड़ी खेलने भी चले जाते हैं लेकिन बाद में पता चलता है कि जो प्रमाणपत्र उन्हें मिला है उसकी मान्यता नहीं है। ब्यूरो