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Karnal News: ट्रेन ठहराव की मांग, चार घंटे रेल ट्रैक किया जाम

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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। ट्रेन ठहराव की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन चढूनी गुट ने मुस्तफाबाद स्टेशन पर रेल ट्रैक जाम कर दिया। इस दौरान किसानों के साथ महिलाएं, बच्चे व अन्य स्थानीय लोग भी प्रदर्शन में शामिल रहे। किसानों के साथ ग्रामीण करीब चार घंटे रेल ट्रैक पर बैठे रहे और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों के ट्रैक पर बैठ की सूचना पर मंडल की ओर से सहारनपुर अंबाला रूट की सभी ट्रेनें रोक दी गई। इस दौरान एक सवारी सहित तीन माल गाड़ियां साढ़े तीन घंटे लेट हुईं। किसान दोपहर साढ़े 12 से करीब पौने चार बजे तक ट्रैक पर बैठे रहे। इसके बाद अंबाला से एडीआरएम हनुमान प्रसाद अंबाला से प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे। एडीआरएम ने एक महीने में ट्रेन का ठहराव करवाने और ट्रैक जाम करने को लेकर किसी किसान नेता, ग्रामीण पर केस नहीं दर्ज करने का आश्वासन दिया तो किसानों ने ट्रैक खाली कर दिया। इससे पहले किसान व ग्रामीणों ने करीब दो घंटे स्टेशन के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की सूचना पर अंबाला डीआरएम कार्यालय से दो अधिकारी भेजे गए, लेकिन उनके आश्वासन पर प्रदर्शनकारी शांत नहीं हुए। उन्होंने डीआरएम को मौके पर बुलाने की मांग की। करीब एक घंटा इंतजार करने के बाद किसान व ग्रामीण ट्रैक पर पहुंचे और दरियां बिछाकर बीच में बैठ गए। लोगों के ट्रैक के बीच बैठने की सूचना पर कंट्रोल रूम से अंबाला-सहारनपुर रूट की सभी ट्रेनों का संचालन रोक दिया गया। किसान व आसपास के लोग काफी समय से गाड़ी संख्या 14521-22 अंबाला-दिल्ली इंटरसिटी के ठहराव की मांग कर रहे हैं।
ट्रैक जाम प्रदर्शन का नेतृत्व भाकियू चढूनी के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना ने किया। संजू ने कहा कि सरकार ने कोरोना संक्रमण के कारण सवारी गाड़ियों का संचालन रोक दिया था। इसके बाद सवारी गाड़ी नहीं चलाई गई। बल्कि सभी सवारी गाड़ियां एक्सप्रेस बनाकर चला दी और लोगों से चार गुणा किराया वसूला जा रहा है। जबकि ग्रामीणों को रेल यातायात से वंचित हो गए हैं। करीब चार साल से सवारी गाड़ी बंद पड़ी है। इसके लिए पहले भी प्रदर्शन किया गया था। तब डीआरएम को ज्ञापन सौंपा गया था। वहीं 30 नवंबर को भाकियू का प्रतिनिधिमंडल डीआरएम से अंबाला में मिला था। तब एक महीने में ट्रेन चलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन तीन महीने बाद भी ट्रेन नहीं चलाई गई। मजबूरन उन्हें अपनी मांग लेकर ट्रैक पर बैठना पड़ा। इस दौरान रादौर के पूर्व विधायक व इनेलो नेता श्याम सिंह राणा के पुत्र नेपाल राणा, रादौर से कांग्रेस विधायक डॉ. बीएल सैनी के पुत्र विशाल सैनी सहित अन्य नेता व पदाधिकारी भी प्रदर्शन में पहुंचे। विशाल सैनी ने कहा कि सरकार रेल के नाम पर लोगों की जेब काट रही है। सवारी गाड़ी पर लोगों से मेल का किराया वसूला जा रहा है और सुविधा पैसेंजर वाली ही मिल रही है। किसानों के ट्रैक पर बैठने की सूचना मिलते ही ट्रेनों को सरसावा, पिलखनी, केसरी, दुखेड़ी में रोकना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने दोपहर का भोजन भी ट्रैक के बीच बैठकर किया।
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चार बजे निकली पहली ट्रेन

किसान दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर ट्रैक पर बैठे थे। हनुमान प्रसाद के आश्वासन के बाद दोपहर तीन बजकर साढ़े चार बजे ट्रैक खाली कर दिया। इसके बाद ट्रैक की जांच कर तीन बजकर 50 मिनट पर फिट घोषित किया। जिसके बाद चार बजे पहली ट्रेन गाड़ी संख्या 15011 लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रेस निकाली गई। यह ट्रेन सवा एक बजे मुस्तफाबाद स्टेशन से गुजरती है। परंतु प्रदर्शन के कारण इसे सरसावा में रोका गया था। वहीं अंबाला की तरफ जाने वाली एक माल गाड़ी पिलखनी में रोकी गई। जबकि सहारनपुर की तरफ जा रही दो माल गाड़ियों को केसरी व दुखेड़ी में रोका गया था। किसानों के आने से मात्र पांच मिनट पहले श्रीगंगानगर ऋषिकेश एक्सप्रेस निकली थी।
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मुस्तफाबाद में ट्रेन रोकने की मांग को लेकर किसानों व ग्रामीणों ने ट्रैक जाम कर दिया था। करीब साढ़े तीन घंटे ट्रैक जाम रहा। चार बजे रेल यातायात बहाल कर दिया गया। किसानों व ग्रामीणों की मांग एक महीने में पूरी की जाएगी। इसके लिए प्रपोजल पहले ही भेजा हुआ है।

एमएस भाटिया, डीआरएम, अंबाला मंडल।
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