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Karnal News: समय पर शिकायतों को निपटाना वरना जुर्माना

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नगरायुक्त
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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। नगर निगम ने शहर में सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, पेयजल आदि मूलभूत सुविधाओं से संबंधित समस्याएं दूर करने के लिए नई व्यवस्था की है। वहीं, इनसे जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए समय सीमा तय की गई है। समय पर शिकायत का समाधान नहीं होने या खामी मिलने पर संबंधित एजेंसी पर जुर्माना लगेगा। यहां तक कि कॉल नहीं उठाने पर अधिकारियों पर भी जुर्माना लगेगा।
खास बात यह है कि लोगों को शिकायत करने के लिए निगम कार्यालय आने की जरूरत नहीं है। इसके लिए सभी 20 वार्डों में एक-एक नागरिक शिकायत केंद्र बनाया जाएगा। प्रत्येक शिकायत केंद्र पर सीवर, पेयजल एवं स्ट्रीट लाइट संबंधी शिकायत दर्ज करने के अलग-अलग बोर्ड लगेंगे। जिन पर संबंधित वार्ड के जेई, एई, एक्सईएन के मोबाइल फोन नंबर अंकित होंगे। निगम के टोल फ्री नंबर-1800-180-270 और व्हाट्सएप पर भी शिकायत की जा सकेगी। बोर्ड लगाने का कार्य वार्ड 11, 12, 13 और 19 में पूरा कर लिया गया है।
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शिकायत केंद्र में एजेंसी के दो कर्मचारी बैठेंगे। जो शिकायतों को रजिस्टर में नोट करेंगे। चार सुपरवाइजर मौके पर जाकर समस्या का निरीक्षण कर समाधान कराएंगे। रविवार को अवकाश रहेगा। बाकी दिन सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे शिकायत केंद्र खुलेंगे।
- अभिषेक मीणा, आयुक्त, नगर निगम

- इन अधिकारियों की जिम्मेदारी की गई तय
इसकी जिम्मेदारी जेई, सहायक अभियंता और कार्यकारी अभियंता की होगी। जेई शिकायत केंद्र में आई शिकायतें एकत्रित करेंगे। सीवर सफाई मशीन, डीजल इंजन एवं जेनरेटर सेट पर जीपीएस सिस्टम की जांच करेंगे। एजेंसी को मैनपावर और सफाई मशीन उपलब्ध कराएंगे। निगम को रिपोर्ट भेजेंगे। डिस्पोजल प्वाइंट और चार डीजल इंजन व जेनरेटर सेट के संचालन और रखरखाव की रिपोर्ट सहायक अभियंता रोज भेजकर बिल एई को देंगे। एई कार्य की साप्ताहिक और कार्यकारी अभियंता 15 दिन में माॅनीटरिंग करेंगे। बिलों की जांच कर समय पर भुगतान सुनिश्चित करेंगे।
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- क्या है फॉर्मेट ए और बी
सीवर लाइनों की सफाई के कार्यों के लिए फॉर्मेट-ए तैयार किया गया है। जिसमें कुल 17 कॉलम बनाए गए हैं। जिनमें सीरियल नंबर, शिकायत दर्ज करने की तिथि, शिकायत का विवरण और मोबाइल नंबर, शिकायत के समाधान की तिथि, कितनी शिकायतों का समाधान किया गया, सीवर मशीनों द्वारा कितनी शिकायतें दूर की गई और कितनी नहीं हुई। इसकी जानकारी होगी। फॉर्मेट बी में क्रमांक से लेकर टिप्पणी तक 16 कॉलम बनाए गए हैं। पहला कॉलम सीरियल नंबर का है, इसके बाद आगे के 10 कॉलम जुर्माना के हैं।
फॉर्मेट-ए में तय जुर्माना:
- फॉर्मेट-ए के तहत समाधान नहीं होने पर एजेंसी की ओर से कॉल नहीं उठाने 1000 रुपये जुर्माना
- 12 घंटे के अंदर समाधान नहीं करने पर प्रतिदिन के हिसाब से 1000 रुपये का जुर्माना
- मैनहोल कवर एवं फ्रेम टूटने पर त्वरित समाधान न करने पर 1000 रुपये प्रति घंटे की दर से जुर्माना
- गली में से गाद, मिट्टी या मलबा 24 घंटे में न उठाने पर 5000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना
- किसी भी नियम का पालन न करने पर हर उल्लंघन पर 5000 रुपये का जुर्माना
फॉर्मेट-बी में तय जुर्माना:
- जेनरेटर सेट स्टार्ट करने में देरी पर प्रति घंटा 1000 रुपये का जुर्माना
- लॉगबुक को मेंटेंन न करने पर प्रति लॉगबुक, प्रति डिस्पोजल, प्रतिमास 3000 रुपये जुर्माना
- साइट पर मैटेरियल उपलब्ध न कराने पर प्रति विजिट 500 रुपये जुर्माना
- जेई, एई व एक्सईएन को मांगी गई सूचना न देने पर प्रति विजिट 1000 रुपये जुर्माना
- प्लांट पर सफाई, वेंटीलेशन, लाइटिंग, मकड़ी के जाले, धूल पाने पर 5000 रुपये जुर्माना
- शराब हाेने पर उपकरण के चार घंटे से अधिक बंद रहने पर 1000 रुपये प्रति घंटा जुर्माना
- प्रत्येक प्लांट पर शौचालय साफ न मिलने पर प्रति निरीक्षण 800 रुपये जुर्माना
- कार्य निर्धारित समयावधि में पूरा न करने पर 1000 रुपये प्रति दिन जुर्माना
- डिस्पोजल पर ऑपरेटर अनुपस्थित पाए जाने पर 2000 रुपये जुर्माना
- डिस्पोजल प्वाइंट पर मोटर, पंप व स्टार्टर बंद मिलने पर प्रतिदिन 5000 रुपये जुर्माना
- बारिश में डिस्पोजल प्वाइंट पर मोटर, पंप सेट और स्टार्टर खराब होने पर 50000 रुपये प्रति निरीक्षण जुर्माना
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