करनाल जिले के सग्गा गांव में झगड़े में घायल युवक की इलाज के मौत के बाद तरावड़ी थाना पुलिस ने हत्या सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपियों की गिरफ्तारी, बंधुआ मजदूरी एक्ट, बीस लाख मुआवजे सहित अन्य मांगों को लेकर कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में परिजनों ने हंगामा किया। इससे बृहस्पतिवार को दिनभर तनाव की स्थिति बनी रही।
सुबह नौ बजे से शाम सवा छह बजे तक नौ घंटे अस्पताल में पीड़ितों ने बवाल काटा। पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। दोपहर बाद अस्पताल पहुंचे नीलोखेड़ी के विधायक भगवान दास कबीरपंथी के खिलाफ भी पीड़ितों ने रोष जताया। दिनभर बवाल काटने पर अस्पताल में एसपी पंकज नैन और एसडीएम योगेश कुमार पहुंचे। उन्होंने पीड़ितों को समझाया और नामजद सहित अन्य आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी के आश्वासन पर पीड़ित शांत हुए। डॉक्टरों के बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाकर पीड़ितों को शव सौंप दिया गया। तरावड़ी थाना पुलिस ने मृतक प्रदीप की पत्नी कमलेश वासी सग्गा की शिकायत पर बिट्टू राणा, इसके पिता उदय राणा व गांव के ही सतीश के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया है। तीनों आरोपियों ने कोर्ट में पेश होकर गिरफ्तारी दी।
तरावड़ी पुलिस के मुताबिक गांव सग्गा में प्रदीप ने नौकरी करने के लिए गांव के ही बिट्टू व उसके पिता उदय राणा से एक साल के एडवांस में रुपये ले लिए। कुछ दिन काम करने के बाद प्रदीप काम पर नहीं गया। बिट्टू व अन्य उसको काम पर बुलाने गए तो उसने काम करने से मना कर दिया। इस पर बिट्टू ने पैसे की मांग की और कहा कि जब तक पैसे नहीं देते तब तक काम करते रहो। इस पर उनमें मारपीट हो गई। 12 जून को झगड़े में प्रदीप घायल हो गया और उसको निजी अस्पताल में दाखिल करा दिया। तरावड़ी थाना पुलिस ने मारपीट का केस दर्ज कर लिया। डॉक्टरी रिपोर्ट पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया गया। अब प्रदीप की मौत होने पर हत्या का केस दर्ज कर लिया गया।
गुरुवार को पीड़ितों ने अस्पताल में बवाल काट दिया और पोस्टमार्टम करवाने के लिए मना कर दिया। अस्पताल में दिनभर तनाव का माहौल रहा। पुलिस बल तैनात रहा। एसपी और एसडीएम के सामने पीड़ितों ने बंधुआ मजदूरी एक्ट, एससीएसटी एक्ट के तहत केस दर्ज, ज्ञात और अज्ञात आरोपियों की गिरफ्तारी, 20 लाख मुआवजा, एक सरकारी नौकरी की मांग की। इस पर एसपी ने 20 लाख रुपये दिलाने से बिल्कुल मना कर दिया और कहा कि कानूनी रूप से आरोपियों को सजा दिलवा सकते हैं। इस पर पीड़ित शांत हो गए।
विरोध जता रहे रिंकू कोहंड, हरपाल चंदेल, कृष्ण कुटेल, राज सिंह चौहान, कुलदीप, जितेंद्र, सुदर्शन, करेशमी, कमलेश ने बताया कि मजदूरी करवाने के कोई रुपये नहीं दिए हैं। बातचीत हुई थी और उसने काम करने से मना किया तो उसको घर से पीटते हुए ले गए। गंभीर चोट मारने के लिए ही प्रदीप की मौत हुई है। आरोपियों का बचाव किया जा रहा है। इस दौरान पीड़ितों की 21 सदस्यों की कमेटी बनी, जो पुलिस की कार्यप्रणाली पर निगरानी रखेगी। पीड़ितों ने कहा कि यदि पुलिस जांच में पक्षपात में मिला तो वह विरोध जताने से पीछे नहीं हटेंगे। दिनभर तरावड़ी थाना प्रभारी नरेशचंद अस्पताल में डटे रहे और पीड़ितों को समझाते रहे। थाना प्रभारी नरेश चंद ने कहा कि कागजी प्रक्रिया में किसी प्रकार की कमी नहीं रखी जाएगी और निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।