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बॉयलर में खराबी, शुरू होते ही बंद हुआ शुगर मिल

Sun, 11 Dec 2016 12:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/करनाल
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करनाल। सीजन शुरू होने के बावजूद देरी से शुरू हुआ शुगर मिल चलने के दो दिन बाद ही बॉयलर में खराबी आने के कारण बंद हो गया है। गनीमत रही कि बॉयलर फटा नहीं। यदि जरा भी चूक और लापरवाही होती तो मिल में बड़ा हादसा हो सकता था। दरअसल बॉयलर के अंदर पानी ही नहीं पहुंच पाया। इससे इसमें लगी ट्यूब लीक हो गई और बॉयलर तपकर लाल हो गया। इससे कर्मचारियों में हड़कंप मच गया और आनन फानन में कर्मचारियों को मशीनोें से नीचे उतारा गया और मिल को बंद कर दिया गया। इस कारण पिछले तीन दिन से शुगर मिल बंद है और गन्ने की पिराई नहीं हो पा रही है। दो दिन से दिन और रात 50 इंजीनियरों की टीम मरम्मत करने में जुटी है। उम्मीद जताई जा रही है कि रविवार दोपहर बाद मिल चल सकता है। वहीं, मिल बंद होने के कारण मेरठ रोड पर किसानों के ट्रैक्टर ट्रालियों की लाइनें लग गई हैं और किसानों को मजबूरी में ठंड में वहीं रहना पड़ रहा है।
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करनाल शुगर मिल वर्ष 1976 में स्थापित हुआ था। इसके बाद से इसका आज तक नवीनीकरण नहीं हुआ। पांच दिन पहले छह दिसंबर को हैफेड के चैयरमेन हरविंद्र कल्याण ने बटन दबाकर मिल से नए सत्र की शुरुआत की थी। अमर उजाला ने सात दिसंबर के अंक में प्रशासन को चेताया था कि बिना नवीनीकरण के ही शुगर मिल को चलाने की तैयारी है और इसमें खराबी आ सकती है। मिल मात्र दो दिन तक ही सुचारु रूप से चल पाया। आठ दिसंबर को मिल के बॉयलर में खराबी आने से यह बंद हो गया। मिल के सूत्रों का दावा है कि बॉयलर में पानी नहीं पहुंचने के कारण तापमान इतना ज्यादा हो गया कि उसके अंदर लगी करीब 43 ट्यूब लीक हो गई। सूत्रों का यह भी दावा है कि अगर तुरंत मिल को बंद नहीं किया जाता तो बॉयलर फट सकता था और बड़ा हादसा हो सकता था। जैसे ही मिल के अधिकारियों को पता चला कि बायलर में खराबी आ गई तो मिल के अंदर हड़कंप मच गया और आनन-फानन में सभी को बाहर निकाला। मिल को बंद करने के बाद ही कर्मचारियों और अधिकारियों ने राहत की सांस ली और मामला उच्च अधिकारियों की जानकारी में दिया। पिछले दो दिन से इंजीनियरों की टीम काम पर लगी हुई है। बताया जा रहा है कि बायलर के अंदर लगने वाली करीब 43 ट्यूब हीट ज्यादा होने के कारण लीक हो गई।
उधर, शुगर मिल के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि शुगर मिल के बॉयलर 49 साल पुराने हैं, लेकिन इस बार मिल प्रबंधन की ओर से सभी ट्यूब बदली गई थी। इसके बावजूद तापमान ज्यादा होने के कारण मिल बंद हो गया। इस बारे में शुगर मिल के कर्मचारियों का कहना है कि समय रहते मिल को बंद कर लिया गया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। बॉयलर में पानी नहीं जाने के कारण खराबी आई है। इंजीनियरों की टीम लगी हुई है। फिलहाल ट्यूब को चेक किया जा रहा है, जो खराब हो गई है, उन्हें बदला जा रहा है। उम्मीद है कि रविवार दोपहर बाद मिल चालू हो जाएगा।
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यूं काम करता है शुगर मिल
दरअसल मिल को चलाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बॉयलर होता है। इसमें पानी जाता है और इससे भांप बनती है। इस भांप से टरबाइन चलती है। इसके बाद मिल का अलटरनेट स्टार्ट होता है, तो बिजली बनती है। इस बिजली से ही पूरे शुगर मिल की मोटरें चलती हैं तो मिल चलता है। अगर बायलर में खराबी आती है तो पूरा मिल बंद हो जाता है, क्योंकि इसके बिना मिल चलना संभव नहीं है।

खतरे से भरा है मिल में काम करना
करनाल शुगर मिल में दो बॉयलर हैं। इनकी क्षमता 23-23 टन की है। ये मिल स्थापित समय के ही हैं और तकनीकी टीमें इन्हें कंडम घोषित कर चुकी हैं। इसी प्रकार टरबाइन की स्थिति है। पुरानी तकनीक के बायलर और टरबाइन होने के कारण हर साल मिल में खराबी आती है और यहां काम करना रिस्की होता है। मिल के ही अंदर के अधिकारियों का दावा है कि जो तकनीक करनाल में चल रही है, वह हिंदुस्तान के किसी भी भी शुगर मिल में नहीं है। बता दें कि मिल में बिजली बनाने वाली एक टरबाइन है। मिल के पास तीन टरबाइन हैं। पुरानी तकनीक के बायलर और टरबाइन सभी मिल हटा चुके हैं और अपडेट तकनीक के बायलर यूज कर रहे हैं, जो काफी अपडेट हैं और सेफ भी हैं। ये सब कंप्यूटराइज्ड हैं।

किसानों की बढ़ी परेशानी
मिल बंद होने के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है। मेरठ रोड पर किसानों के ट्रैक्टर और ट्रालियां खड़ी हैं और लाइन लंबी होती जा रही है। मिल के अंदर भी गन्ने से भरी सैकड़ों ट्रालियां खड़ी हैं। किसान परमजीत सिंह, रामनाथ का कहना है कि वे तीन से मिल में पड़े हैं, लेकिन मिल चालू नहीं हो पाया रहा है। किसानों के लिए न तो ठहरने के लिए कोई व्यवस्था है और न ही शौचालय साफ हैं। किसानों का कहना है कि रात तो इतनी ठंड में उन्हें अपने ट्रैक्टर ट्रालियों की देखभाल करनी पड़ती है। ठंड के कारण कई किसान तो बीमार भी हो चुके हैं। किसानों का कहना है कि अगर जल्द मिल चालू नहीं हुआ वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।

43 लाख क्विंटल का है लक्ष्य
इस वर्ष मिल एरिया में गन्ने का रकबा 16055 एकड़ है। इसमें 86 प्रतिशत से ज्यादा अगेती किस्मों का गन्ना है। इस वर्ष मिल में गन्ने की कुल बोंडिग 43 लाख क्विंटल है। गन्ने का पिराई लक्ष्य 32 लाख क्विंटल रखा गया है। इसके साथ-साथ गन्ने से रिकवरी का लक्ष्य भी 10.90 प्रतिशत रखा है। अगेती किस्म में यह लक्ष्य अधिक होने की संभावना है।  इस वर्ष भी मिल द्वारा किसानों के लिए 316 .33 लाख रुपये की गन्ना विकास योजना बनाई है। इसके अतिरिक्त मिल में राज्य स्तरीय टिशु कल्चर लैब की स्थापना की गई है।

सरकार कोरे झूठे दावे कर रही है। अधिकारी सरकार को बहला रहे हैं और झूठे रिपोर्ट दे रहे हैं। करनाल शुगर मिल का पूरा प्लांट कंडम घोषित हो चुका है। इससे काम लेना सीधे मौत से खेलने के समान है। बार बार नवीनीकरण की बात करके सरकार किसानों को टरका रही है। हर साल मिल बार बार बंद होता है, लेकिन इसका सरकार पर कोई असर नहीं है। इस मामले को लेकर भाकियू सड़कों पर उतरेगी और नए प्लांट की मांग करेगी। भाकियू कई साल से यह मांग उठाती आ रही है, लेकिन सरकार तब मानेगी, जब मिल में कोई बड़ा हादसा हो चुकेगा।
-रत्न मान, प्रदेशाध्यक्ष, रत्न मान।

बॉयलर में पानी नहीं पहुंच पाने का कारण गड़बड़ी हुई। बॉयलर करीब 49 साल पुराने हैं, इसलिए खराबी आ जाती है। ये आउटडेटेड हो चुके हैं। इसके बावजूद इनसे ही काम लिया जा रहा है। सोनीपत व अन्य जिलों से इंजीनियरों को बुलाया गया है, करीब 50 लोग मरम्मत में लगे हैं। उम्मीद है कि रविवार दोपहर के बाद मिल चालू हो जाएगी।
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- विजय पाल, चीफ इंजीनियर, शुगर मिल करनाल।
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