मंगलौरा के पास स्थित टोल प्लाजा पर कृषि वाहनों से अवैध वसूली करने के मामले में विजिलेंस ने मुख्य आरोपी पीडब्ल्यूडी के जेई रणधीर को गिरफ्तार कर लिया।
विजिलेंस ने यह कार्रवाई अब तक पकड़े गए कर्मचारियों के बयानों के आधार पर की है। सभी कर्मचारियों ने बताया कि वे पैसे एकत्रित करके जेई को देते थे।
एक मई को विजिलेंस टीम ने मेरठ रोड स्थित मंगलौरा के पास स्थित टोल प्लाजा पर छापा मारा था। इस दौरान टीम ने छह कर्मचारियों को पकड़ा था।
ये सभी कृषि यंत्रों से भी टोल वसूल रहे थे। पूछताछ में आरोपी कर्मचारियों ने बताया कि वे पैसे एकत्रित करके कर्मचारी अरुण को देते थे। सोमवार को विजिलेंस टीम ने अरुण को गिरफ्तार कर पूछताछ की।
अरुण ने बताया कि वह वह पैसे एकत्रित करके जेई रणधीर को देता था। इसके बाद अरुण को अदालत में पेश किया गया। वहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
मंगलवार देर शाम विजिलेंस इंस्पेक्टर ओमप्रकाश भारद्वाज ने आरोपी जेई को गिरफ्तार कर लिया। विजिलेंस उससे पूछताछ कर रही है।
इंस्पेक्टर ने बताया कि इस मामले में अभी तक आठ आरोपी पकड़े जा चुके हैं। जेई ने माना है कि पैसे उसके पास आते थे।
एक माह कर चल रही थी जांच
एक मई को गांव बिजना निवासी प्रमोद त्यागी की शिकायत पर विजिलेंस ने जाल बिछाया और टीम टोल प्लाजा से कृषि वाहनों से अवैध वसूली करने के आरोप में सुपरवाइजर सुमित व राममेहर, श्याम लाल, नंदलाल व दो अन्य को काबू किया था।
विजिलेंस ने सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। पिछले एक माह से टीम मुख्य आरोपी तक पहुंचने के लिए प्रयास में जुटी थी।