पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि कई कर्मचारी बिना वर्दी और पहचान पत्र के ड्यूटी कर रहे थे, जिससे उनकी पहचान तक स्पष्ट नहीं हो सकी। लोगों ने सवाल उठाया कि नियमों के बावजूद कर्मचारियों द्वारा वर्दी और नेम प्लेट नहीं पहनना सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
घटना के बाद स्थानीय लोगों और राहगीरों में रोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि टोल प्लाजा पर कर्मचारियों की अभद्रता और दबंगई की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले बढ़े हुए हैं।
लोगों ने कहा कि टोल कर्मचारी नियम लागू करने के बजाय गुंडागर्दी पर उतर आए हैं, जिससे आम लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। पीड़ित परिवार ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, नेशनल हाईवे अथॉरिटी, जिला प्रशासन और पुलिस से निष्पक्ष जांच कर दोषियों की गिरफ्तारी की मांग उठाई है। ग्रामीणों ने टोल कंपनी का टेंडर रद्द करने की मांग की है।
उपलना निवासी शुभम, राममेहर सहित अन्य ने बताया कि प्योंत, कत्लाहेड़ी, गुल्लरपुर सहित आसपास के कई गांव स्थानीय टोल फ्री श्रेणी में आते हैं। वहीं, घटना की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिसमें कथित तौर पर कई कर्मचारी वाहन की ओर दौड़ते दिखाई दे रहे हैं।