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शहर में बिना नक्शे पास बन रहे दुकान और मकान

Thu, 13 Oct 2016 12:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
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शहर में बिना नक्शे पास बन रहे दुकान और मकान - फोटो : Amar Ujala
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 नगर निगम क्षेत्र में बिना अनुमति के अवैध निर्माण हो रहे हैं। बिना नक्शा पास कराए ही शहर में रोजाना दर्जनों निर्माण हो रहे हैं। इनमें मकान भी शामिल हैं और दुकान भी। नियमों की दरकिनार कर शहर में न केवल कई मंजिला भवन बन रहे हैं, बल्कि बेसमेंट तक बनाए जा रहे हैं। नगर निगम हालांकि नोटिस देकर अपनी ड्यूटी बजा रहा है, बावजूद इसके न तो लोग अवैध निर्माण करने से रुक रहे हैं और न ही नक्शे पास करा रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नक्शा पास कराने के लिए आवेदन करने वालों की संख्या बहुत कम है।
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वहीं, चार अक्टूबर से सरकार की ओर से नक्शा पास कराने की दरें आठ से दस गुणा तक करने से और निगम के पसीने छूट गए हैं। निगम के ही अधिकारियों का मानना है कि पहले की सस्ती दरों पर ही लोग नक्शा पास नहीं करा रहे हैं तो अब नई दरें तो इतनी महंगी हैं कि नक्शा पास कराने में प्लाट मालिक के भी पसीने छूटने तय हैं। बता दें कि नगर निगम करीब सवा लाख घर हैं और इनमें 3.91 लाख लोग रहते हैं। इसके अलावा, करीब 30 हजार दुकानें हैं। वहीं, रोजाना निगम क्षेत्र में व्यावसायिक भवन भी बन रहे हैं, लेकिन लोग इसके लिए न तो नक्शा फीस दे रहे हैं और न ही निगम की इसकी सूचना दे रहे हैं। जब निगम को इसकी जानकारी मिलती है तब तक पूरा भवन और दुकान बन चुकी होती है। निगम के सूत्र बताते हैं कि बिना किसी नियम की परवाह किए हुए लोग जमकर जमीन को खोद रहे हैं और बेसमेंट तैयार कर रहे हैं।

हर माह आते हैं 20 से 25 आवेदन
निगम के अधिकारी बताते हैं कि चार लाख के करीब की जनसंख्या के इस शहर में मात्र 20 से 25 लोग हर माह नक्शा पास के लिए आवेदन करते हैं, ये आंकड़ा तब का जब दरें घरों के लिए 120 और व्यावसायिक के लिए 1000 रुपये प्रति गज थी। अब दरें घरों के लिए 1000 और व्यावसायिक के लिए दो हजार रुपये प्रति गज हो चुकी है। नक्शा पास कराने की फीस में हुई आठ से दस गुणा तक की फीस के कारण अब यह माना जा रहा है कि पहले सस्ती दरों पर ही लोग भवन व दुकान का नक्सा पास नहीं कराते थे, अब इतनी दरें बढ़ जाने का उल्टा असर पड़ेगा। निगम के लिए कम स्टाफ होने के कारण लोगों से बढ़ी दरों से फीस वसूलना एक चुनौती होगा।
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सवा लाख मकान, दो भवन निरीक्षक
नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत करीब सवा लाख घर आते हैं, लेकिन निगम में स्टाफ के नाम पर केवल दो भवन निरीक्षक हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसे अवैध निर्माणों को रोका जा सकता है? नियमों के अनुमान निगम में डीटीपी, एटीपी समेत पांच भवन निरीक्षक समेत दस लोगों का स्टाफ होना चाहिए, लेकिन क्षेत्र ज्यादा होने के कारण सभी अवैध निर्माणों पर नहीं पहुंचा जा सकता। निगम के अधिकारियों का कहना है कि फीस जमा नहीं कराने के कारण मालिकों को नोटिस जाते हैं, अगर नोटिस का जवाब नहीं मिलता है तो फिर दुकान या फिर मकान को सील करने का प्रावधान है। बता दें कि जुलाई माह में फूसगढ़ के पास स्थित एक रियल एस्टेट कंपनी की पूरी कालोनी को ही सील कर दिया गया था। बाद में पैसे जमा कराने के बाद सील को खोला गया था।

नक्शा पास की नई दरें
नगर पालिका क्षेत्र में पहले भवन के नक्शा पास की दरें 80 रुपये थी, जो अब बढ़ाकर 500 रुपये प्रति गज कर दी गई हैं। व्यवसायिक 120 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दिया गया है। इसी प्रकार नगर परिषद के क्षेत्र में सामान्य 120 रुपये से बढ़ाकर 750 रुपये कर दिया है। व्यवसायिक रेट 1500 रुपये प्रति गज किया है। नगर निगम क्षेत्र में दरें 120 से बढ़ाकर 1000 रुपये और व्यावसायिक के लिए 1000 से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रति गज किया गया है।

नियमों का उल्लंघन है, नोटिस मिलेगा
कोई भी निर्माण करने के लिए नगर निगम की अनुमति जरूरी है, साथ ही इसके लिए नक्शा पास कराना जरूरी है। बिना नक्शा पास कराए निर्माण करना गैर कानूनी है और यह नियमों का उल्लंघन है। निगम की आय का यह मुख्य स्रोत है। जो लोग ऐसा कर रहे हैं, उनको नोटिस जारी कराए गए हैं और आगे भी उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जहां से भी शिकायत मिलती है, वहां पर कार्रवाई के लिए स्टाफ को भेजा जाता है।
रेणु बाला गुप्ता, मेयर।

नक्शा पास कराने के बाद ही कराए निर्माण
शहर में अवैध निर्माण करने वालों और बिना नक्शे पास कराने वालों पर निगम की पूरी नजर है। लगातार इसकी रिपोर्ट तैयार की जाती हैं। जो लोग नक्शा पास नहीं कराते हैं उनको नोटिस जारी किए गए हैं, अगर इसके बाद भी वे फीस जमा नहीं कराते हैं उनको प्रतिष्ठानों को सील किया जाता है। निगम नक्शा फीस को लेकर गंभीर है और इसको लेकर किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी। लोगों को चाहिए वे नक्शा पास कराने के बाद ही निर्माण कराएं,ताकि बाद में किसी भी प्रकार की परेशानी न आए।
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धीरज कुमार, कार्यकारी अधिकारी। 
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