अमर उजाला ब्यूरो
घरौंडा (करनाल)।
यूपी के खनन माफिया ने बंदूक के दम पर हरियाणा की भूमि से लाखों मीट्रिक टन रेत का अवैध खनन किया हैं। माफिया की इस सीनाजोरी से प्रदेश सरकार को करोड़ों रुपये की चपत लग चुकी हैं। एनजीटी के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए खनन माफिया ने लालुपुरा गांव में बीस फुट गहराई तक यमुना को खोद दिया। नदी में मशीनों से हुई खुदाई से प्रदेश के किसानों को भी लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। खनन विभाग की जांच में इन सभी आंकड़ों का खुलासा हो चुका हैं। बावजूद इसके, अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रदेश सरकार के खजाने में करीब पौने तीन करोड़ रुपये की चपत लगाने वाले यूपी के खनन माफिया के खिलाफ प्रशासन ने कोई एक्शन नहीं लिया गया। लिहाजा माफिया के हौसले बुलंद हैं। हरियाणा भूमि से लगातार रेत का अवैध खनन किया जा रहा हैं। लालुपुरा गांव के किसानों की शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए पहुंची खनन अधिकारी जींद व खनन अधिकारी सोनीपत की संयुक्त टीम ने अपनी रिपोर्ट आलाधिकारियों को भेज दी है। इस जांच के अनुसार, खनन माफिया ने लालुपुरा गांव के किसानों की करीब दो एकड़ भूमि से बीस फूट गहराई तक खुदाई करके 69 हजार, 696 मीट्रिक टन रेत निकाला है। इसके अलावा, लगभग छह एकड़ भूमि से चार फुट तक खनन किया गया हैं। इससे करीब 41 हजार 818 मीट्रिक टन रेत की माइनिंग हुई हैं। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, लालुपुरा इलाके में यमुना नदी से एक लाख 11 हजार 514 मीट्रिक टन रेत का अवैध खनन हुआ हैं। माइनिंग अधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अवैध खनन हुए रेत की कीमत साढ़े चार करोड़
खनन माफिया ने लालुपुरा गांव के किसानों को डरा धमका कर उनके खेतों से 27 लाख 85 हजार फुट से अधिक रेत का खनन किया हैं। रेत के बाजार भाव के अनुसार खनन किये गए हुए इस रेत की कीमत लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये हैं। प्रदेश सरकार को खनन से नौ रुपये प्रति फुट रायल्टी मिलती हैं। यमुना में हुई अवैध माइनिंग से सरकार को करीब पौने तीन करोड़ के राजस्व का हर्जाना हुआ हैं। रॉयल्टी में हुए नुकसान के इलावा रेत पर सरकार को मिलने वाले पांच प्रतिशत जीएसटी का चूना भी लग गया हैं। करोड़ों रुपये के रेत खनन किये जाने के बावजूद हरियाणा का प्रशासन खनन माफिया की कार्रवाई मूकदर्शक बनकर देख रहा हैं।
किसानों को लाखों का नुकसान
यमुना इलाके में हुए इस खनन की शिकायत के बाद प्रशासन ने भूमि की निशानदेही करवाई थी। जिससे खुलासा हुआ की खनन की गई जमीन लालुपुरा गांव के किसानों की हैं। किसान कमल, पाला राम, नरेश, राम छैल, रोशन व अन्य का आरोप है कि यूपी के ठेकेदारों ने उन्हें डरा धमका कर उनके खेतों में खड़ी फसलों को तबाह कर खनन किया हैं। कानून के खिलाफ खनन माफिया ने जेसीबी व पोपलेन मशीनों से उनके खेतों को बीस फुट गहराई तक खोद दिया। जिससे उनके खेत बर्बाद हो गए। सरकार के नियमानुसार खनन के लिए किसान को भूमि का मुआवजा दिया जाता हैं। किसानों के मुताबिक इस अवैध माइनिंग से उनका लाखों रुपये का नुकसान हुआ हैं।
माइनिंग अधिकारी की शिकायत पर दो ठेकेदारों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस टीम छानबीन में जुटी है, जल्द ही आगामी कार्रवाई की जाएगी। -मनोज कुमार थाना प्रभारी घरौंडा।