अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। जिला उपभोक्ता फोरम ने निजी कंपनियों द्वारा कर्ज के नीचे दबे किसानों को राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। इसमें प्राइवेट कर्ज देने वाली कंपनी को 25 हजार रुपये का हर्जाना अदा करने के साथ-साथ बकाया राशि का भुगतान दी गई रकम को काट कर दिए जाने के निर्देश दिए हैं। किसान बलजीत सिंह निवासी गांव निसिंग ने कोटक महिंद्रा बैंक की करनाल के सेक्टर-12 स्थित शाखा से एक ट्रैक्टर खरीदते हुए 4 लाख, 31 हजार 359 रुपये का कर्ज 10 जुलाई, 2014 को 20 अर्ध वार्षिक किश्तों में अदायगी प्रति किश्त 34 हजार 50 रुपये लिया था। इसके बाद किसान ने पहली ही अदायगी किश्त के दौरान ही कंपनी को 18 जुलाई को 50 हजार रुपये की अदायगी कर दी और 13 सितंबर 2014 को दूसरी किश्त से पहले ही 3 लाख रुपये दे दिए, लेकिन फरवरी 2017 को किसान को कंपनी द्वारा दिए गए विवरण से जानकारी प्राप्त हुई कि कंपनी ने उस द्वारा जमा की गई राशि में से उसके खाते की किश्त 34 हजार 50 रुपये ही काटे गए हैं और उसकी ओर अभी 3 लाख 15 हजार रुपये ज्यादा खडे़ हैं। बाद में किसान ने जिला उपभोक्ता फोरम की शरण ली और यह मामला फोरम द्वारा गंभीरता से लिया गया, इस दौरान कंपनी ने दोनो पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला दिया कि कंपनी इस सबंध में कोई तर्क संगत दलील नहीं दे पाई और जिला उपभोक्ता फोरम ने अध्यक्ष जसवंत सिंह के नेतृत्व में गठित दो सदस्यीय खंडपीठ ने किसान को राहत देते हुए कंपनी को 25 हजार रुपये का किसान को हर्जाना व बकाया कर्ज का भुगतान किसान द्वारा दी गई रकम को काट कर करने के आदेश दिए हैं।