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कंडीशन पूरी नहीं करने वाले 64 प्लाट करने थे रिज्यूम, कमेटी अधिकारियों ने मेहरबानी से कर दिये बहाल

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। मार्केट कमेटी करनाल का एक और कारनामा सामने आया है। इस मामले में कमेटी के अधिकारियों ने बोर्ड के एक्ट को ताक पर रखकर 64 प्लॉटों को रिज्यूम करने की बजाए बहाल कर दिया। असल में ये प्लाट धारकों उन कंडीशन को पूरा नहीं कर रहे थे, जो प्लॉट अलाट करते समय लागू की गई थी। बावजूद इसके अधिकारियों ने आढ़तियों पर मेहरबानी करके ये प्लाट बहाल कर दिये। इस मामले में मंडी सचिव से लेकर आला अधिकारी तक मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं। कार्रवाई के नाम पर इस मामले में केवल मंडी सुपरवाइजर ललित सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई, जबकि जिम्मेदार सचिव, अकाउंटेंड समेत दस अधिकारियों के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
बता दें कि नई अनाज मंडी के लिए धारकों को ड्रा के माध्यम प्लॉट अलॉट किये गए थे। इनमें से 66 प्लॉट धारक कंडीशन पूरी नहीं कर सके और विभाग ने इनके प्लाट रिज्यूम कर लिए। स्पेशल आडिट टीम की रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद इन प्लॉट धारकों ने विभाग के मुख्य प्रशासक के पास अपील दायर की और दोबारा से प्लाट बहाली के लिए मांग की। रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2014 में ये प्लाट विभाग द्वारा दोबारा से बहाल कर दिये गए। हालांकि, इसके साथ ही शर्तें भी लगाई गई, इसके तहत प्लाट धारकों को कहा गया था पत्र जारी होने के 15 दिन बाद कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत राशि जमा करानी होगी, साथ ही तीन माह में पूरी किश्तें भरनी होंगी। इसके अलावा, छह माह में निर्माण पूरा करना होगा। अगर कोई ऐसा नहीं करता है तो उनके प्लाट को दोबारा से रिज्यूम किया जाएगा। आडिट टीम की रिपोर्ट के अनुसार, कंडीशन पूरी नहीं करने पर भी कमेटी के अधिकारियों ने प्लाट धारकों के प्लाट रिज्यूम (जब्त) नहीं किये।
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टीम के सामने प्रस्तुत नहीं कर पाये रिकॉर्ड
भ्रष्टाचार की बू आने पर विभाग ने वर्ष 2012-13 व 2014-15 के कार्यकाल की स्पेशल ऑडिट कराई थी। इसमें राजेश सांगवान की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीन ने जांच की थी। ऑडिट टीम ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि मार्केट कमेटी करनाल द्वारा कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने बारे में कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद एचएसएएमबी के कार्यकारी अभियंता से भी अपील की गई कि वे कंप्लीशन सर्टिफिकेट रिकार्ड दें, लेकिन कार्यकारी अभियंता ने जवाब दिया कि इसका रिकार्ड उनके आफिस में नहीं रखा जाता। साथ ही ये भी बताया गया कि उनके रिकॉर्ड के अनुसार, केवल तीन दुकानों का कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया गया है। बता दें कि कंप्लीशन सर्टिफिकेट डीएमईओ व एमएमसी के साइन के बाद ही इश्यू किया जाता है। डीएमईओ ने अपने पत्र क्रमांक 1175 के द्वारा सूचित किया कि कंप्लीशन सर्टिफिकेट पर डीलिंग हैंड, एसएमसी ने काउंटर साइन किये हैं। ऑडिट कमेटी ने लिखा है कि उपरोक्त तथ्यों के अनुसार, केवल 3 प्लॉट का ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट रिकमेंड किया गया था, इस प्रकार कुल 66 प्लाटों में से 63 प्लाट कंडीशन की उल्लंघना के कारण रिज्यूम किये जाने थे। क्योंकि दिये हुए समय के अनुसार, अपना कंप्लीशन नहीं कर पाये, बावजूद इसके इनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया। इसी प्रकार, एक प्लाट का कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी निर्धारित तिथि से बाद में दिया हुआ पाया, इससे अंदाजा है कि इसका निर्माण तिथि से बाद में हुआ है। इस प्रकार से 64 प्लॉट रिज्यूम किये जाने थे, पर कमेटी ने कोई एक्शन नहीं लिया गया। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि यह एक भारी गलती है और हायर अथोरिटी के आदेशों अवहेलना है।

अप्रूवलग्रांट मिलने से पहले ही जारी कर दिये ट्रांसफर लेटर
ऑडिट टीम ने 75 फाइलों के रिकॉर्ड की चेकिंग के दौरान आडिट टीम ने ये भी पाया कि मार्केट कमेटी करनाल द्वारा 29 प्लॉट व बूथ के ट्रांसफर सर्टिफिकेट दिये गए हैं। इनको जांच के लिए जेडएमईओ अंबाला को पत्र लिखा गया। जेडएमईओ अंबाला ने सूचित किया कि केवल 6 प्लॉट व बूथों को परमिशन दी गई है। ट्रांसफर और प्लाट के रिकॉर्ड से यह सामने आया है कि मार्केट कमेटी करनाल ने अप्रूवल ग्रांट होने से पहले ही ट्रांसफर लेटर इश्यू कर दिया गये। इसी प्रकार, अप्रूवल ग्रांट 18-11-2014 को दी गई, लेकिन ट्रांसफर लेटर धारकों को 30-10-2014 कोही जारी कर दिये। टीम ने संदेह व्यक्त किया और रिकॉर्ड आया तो और सामने आएगा। इस बारे में कमेटी के सचिव जिले ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
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हमने स्पेशल ऑडिट में भी गड़बड़ी पकड़ी थी, उसे बारे में आला अधिकारियों को सूचित कर दिया गया था। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट के आर्डर तो हुए थे, हालांकि, इसकी अनुपालना हुई कि नहीं, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। इसकी जानकारी प्रशासकीय विभाग दे सकता है।
-राजेश सांगवान, चीफ एकाउंट्स एंड फाइनेंस, मार्केटिंग बोर्ड।
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