अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। प्रदेश सरकार एक तरफ तो ऊर्जा की बचत करने को लेकर सभी जगह एलईडी बल्ब लगाने का अभियान चलाती है, वहीं नगर निगम बिजली बढ़ाने को लेकर काम कर रहा है। नगर निगम में नियमों को ताक पर रख कर लाखों रुपये के एसी खरीद लिए गए, इतना ही नहीं उन्हें जेई से लेकर कमिश्नर तक के कमरों में लगा भी दिया गया। इसका असर ये हुआ कि ये एसी वर्ष 2015 से लेकर 2018 तक खरीदे गए। एक तो ये एसी उन कर्मचारियों पर लगा दिए गए, जो इसके लिए इनटाइल्ड नहीं हैं, दूसरा इससे निगम का बिजली बिल तीन गुना तक बढ़ गया है।
बता दें कि प्रदेश सरकार के 1970 के नोटिफिकेशन के अनुसार केवल चुनिंदा अधिकारी ही एसी का प्रयोग कर सकते हैं। सरकार की ओर से बाकायदा उन अधिकारियों के पदों का जिक्र किया गया है। इसके बावजूद सरकार के नियमों की अवहेलना करते हुए नगर निगम ने खुद की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक के बाद एसी खरीदे। निगम के कार्यालय में इस समय 22 एसी चल रहे हैं, जबकि यहां पर अधिकारी केवल एचसीएस लेवल का एक ही है। इनके अलावा, डिप्टी कमिश्नर, ईओ और सचिव के बाद कार्यकारी अभियंता समेत एसडीओ और जेई का कार्यालय हैं। इनमें सभी में एसी चल रहे हैं। इससे भी बड़ी बात ये है कि आखिर ये एसी किस मद से खरीदे गए और किस नियम के तहत खरीदे गए।
प्रदेश सरकार का फाइनेंस विभाग भी समय समय पर नोटिफिकेशन जारी करके निर्देश देता है कि लग्जरी आइटम नहीं खरीदे जाएंगे। इनमें एसी, कारपेट, महंगा फर्नीचर, क्राकरी, न्यू कार और नये वाहन आदि शामिल हैं। बावजूद इसके निगम की ओर से लाखों रुपये के एसी खरीदे गए।
बजट से ज्यादा खर्च किए, ठेकेदारों के अटके करोड़ों रुपये
निगम ने इस बार बजट से अधिक खर्च कर दिया, इस कारण विकास कार्य अटक गए हैं और फिलहाल ठेकेदारों के भी करोड़ों रुपये के बिल अटके हुए हैं। बता दें कि विकास कार्यों के लिए 44 करोड़ रुपये रखे थे, लेकिन बिना हिसाब के ही 72 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। इस समय निगम में बजट खाली है। कहीं से कोई ग्रांट नहीं आने के कारण फिलहाल वार्डों में विकास कार्य अटक गए हैं। साथ ही जिन ठेकेदारों द्वारा कार्य पूरा कर दिया गया है, उनकी मोटी पेमेंट फंसी हुई है।
50 हजार से डेढ़ लाख हो गया बिल
बता दें कि जिस समय पर नगर निगम का पुराना ऑफिस था, उसमें कुछ एक अधिकारियों के कमरों में एसी थे। करीब दो साल पहले निगम का ऑफिस डीएवी कॉलेज के सामने शिफ्ट कर लिया गया। यहां पर एक के बाद एक 22 एसी खरीदे गए। ये एसी चालू होने के बाद से निगम का दो माह का बिल 50 हजार रुपये से बढ़कर सीधे डेढ़ लाख रुपये तक हो गया।
थानों से लेकर तहसील तक सभी जगह लगे एसी
नगर निगम के अलावा, थानों से लेकर तहसील तक में एसी लगे हैं। इसके साथ ही लघु सचिवालय में क्लर्क बाबू भी एसी की ठंडी हवा खा रहे हैं। यहां पर एसी की भरमार होने के कारण जमकर बिजली बिल कई गुना तक बढ़ा रहा है। इनके अलावा भी जहां जहां पर प्रदेश सरकार के विभागों में कूलरों की बजाए एसी दौड़ रहे हैं।
वर्ष 1970 मेें जारी हुई थी एडवाइजरी
एसी लगाने को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से वर्ष 1970 में एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इसके बाद से कोई नोटिफिकेशन नहीं जारी किया गया। इसके तहत जिला स्तर के अधिकारियों को सुविधा उपलब्ध नहीं है। हरियाणा सरकार की यह एडवाइजरी जारी होने के बाद भी डीसी तक अपने कार्यालय में एसी नहीं लगा सकते हैं, रूम कूलर लगा सकते हैं।
निगम का बेतुका तर्क : कंप्यूटर ठंडा रखने को लगाए एसी
नगर निगम ने एसी लगाने के पीछे बेतुका तर्क दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट राजेश शर्मा ने इस मामले में निगम में एसी लगाने को लेकर आरटीआई लगाई। आरटीआई में निगम के सूचना अधिकारी ने जवाब दिया है कि कंप्यूटरों के लिए तापमान मेंटेन करने के लिए ये लगाए गए हैं।
इसके साथ ही निगम ने एसी खरीदने को लेकर किए गए सवाल पर कहा है कि इसके लिए प्रदेश सरकार की ओर से कोई हार्ड एंड फास्ट रूल नहीं है। दूसरी ओर, सवाल ये भी है कि ये एसी केवल निगम के जेई से लेकर इससे ऊपर स्तर के अधिकारियों के कमरों में लगाए गए हैं, जबकि जहां पर पब्लिक डीलिंग के लिए विंडो खोली गई है। यहां पर एक एक कमरे में तीन से चार कंप्यूटर हैं, यहां पर भी एसी नहीं लगाया है। इसके अलावा, विंडो के सामने जहां पर पब्लिक पसीने से तरबतर होती है, वहां पर तो पंखे तक की व्यवस्था नहीं की गई है। सामाजिक कार्यकर्ता राजेश शर्मा ने बताया कि वे इस मामले को हाईकोर्ट में ले जाएंगे।