अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। आईटीआई चौक पर हुए पथराव और हवाई फायरिंग मामले में अब घायल पुलिस कर्मचारियों ने पुलिस कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा है कि अगर पुलिस फाय रिंग नहीं करती तो उपद्रवी बड़ा हादसा कर सकते थे। क्योंकि वे पत्थरबाजी कर लगातार उग्र होते जा रहे थे, जिससे अफरा-तफरी मच गई और राहगीरों और आसपास के दुकानदारों को भी खतरा होने लगा था। ऐसे में पुलिस के पास उपद्रवियों को डराने और भगाने के लिए हवाई फायरिंग के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
आईटीआई लाठीचार्ज और फायरिंग मामले में जांच कर रहे एएसपी मुकेश कुमार के सामने ये बयान छह घायल पुलिस कर्मचारियों ने बारी-बारी से दिए हैं। बता दें कि इस मामले में आईटीआई के प्रिंसिपल और स्टाफ पहले ही एएसपी के सामने अपने बयान दर्ज करा चुके हैं। हालांकि, अभी तीन घायल अनुदेशक अभी भी बयान नहीं दे पाए हैं।
मंगलवार को इस मामले में एएसपी मुकेश कुमार के सामने उन छह घायल पुलिस कर्मचारियों को पेश किया गया, जो इस पत्थरबाजी में चोटिल हुए हैं। एक-एक करके पुलिस कर्मचारियों ने आईटीआई के विद्यार्थियों और उपद्रवियों को कई बार समझाया गया, लेकिन वे पत्थरबाजी करते रहे। इसकी वजह से न केवल पुलिस कर्मचारी घायल हुए, बल्कि तीन घंटे तक कुंजपुरा रोड पर जाम की स्थिति रही और जीटी रोड पर भी यातायात प्रभावित रहा। पुलिस कर्मचारियों ने बताया कि आईटीआई परिसर के अंदर पुलिस कर्मचारी और अधिकारी विद्यार्थियों को समझा रहे थे, लेकिन अचानक ही विद्यार्थी बिफर गए और उन्होंने पुलिस कर्मियों को घेरकर पीटना शुरू कर दिया। ऐसे में 27 पुलिस अधिकारी व कर्मचारी चोटिल हुए हैं। इसके अलावा, घायल पुलिस कर्मचारियों ने ये भी दावा किया है कि अगर लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग की जाती तो उपद्रवी आगे बढ़कर रोडवेज बसों और आम जनता को भी हानि पहुंचा सकते थे। हालात को कंट्रोल करने के लिए पुलिस कर्मचारी आईटीआई परिसर के अंदर घुसे थे, क्योंकि आईटीआई के अंदर से भी लगातार पत्थरबाजी की जा रही थी।
शेष अनुदेशकों के 18 को होेंगे एसडीएम के पास बयान
इस मामले में एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक की अध्यक्षता में बनी जांच कमेटी के सामने 18 अप्रैल को आईटीआई के शेष अनुदेशक अपने बयान दर्ज कराएंगे। गौरतलब है कि प्रिंसिपल समेत चार अनुदेशक अपने बयान दर्ज कराकर वीडियो भी सौंप चुके हैं। अनुदेशक रामबिलास, सुरेंद्र व मलखान सिंह चोटिल होने के कारण अपने बयान नहीं दे सके हैं।
बस क्यू शेल्टर के मामले में पुलिस प्रशासन का प्रस्ताव आएगा तो वे विभाग की अनुमति के लिए मुख्यालय पंचकूला भेज देंगे। क्योंकि जमीन आईटीआई है, इसलिए आला अधिकारियों की अनुमति के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। वैसे सैद्धांतिक रूप से हम छात्रों के लिए बस क्यू शेल्टर बनाने के पक्ष हैं और यह प्रयास अच्छा है।-बलदेव सिंह, प्रिंसिपल, आईटीआई, करनाल।