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कैसे खत्म होगा भ्रष्टाचार, एसआईटी आरोपियों को गिरफ्तार करने को नहीं तैयार

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल भ्रष्टाचार के खात्मे का दावा करते हैं, लेकिन उनके ही शहर में भ्रष्टाचार के एक हाईप्रोफाइल मामले में पुलिस कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। मामला मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों द्वारा राइस मिलर्स से 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का है।
मामला बड़ा होने के कारण एसआईटी बना दी गई, लेकिन एसआईटी आरोपियों को गिरफ्तार करने की बजाय मामले को लटकाती जा रही है। पिछले सात माह से एसआईटी इस मामले की तफ्तीश कर रही है। जांच की कितनी तेजी से चली है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एसआईटी अब तक केवल राइस मिलर्स राजेंद्र रहेजा से फोन पर पैसे मांगने के आरोपी मंडी सुपरवाइजर अरविंद कुमार को ही गिरफ्तार कर पाई है, शेष चार आरोपियों की गिरफ्तारी तक के प्रयास नहीं किए गए, बल्कि उनको पूरा मौका दिया गया कि पाक साफ निकल जाएं।
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बता दें कि जनवरी माह में राइस मिलर्स राजेंद्र रहेजा की शिकायत पर सिटी थाना पुलिस ने मार्केटिंग बोर्ड के पांच आरोपियों के केस खिलाफ केस दर्ज किया था। राइस मिलर्स राजेंद्र रहेजा ने जो शिकायत दी थी मार्केट कमेटी के अधिकारी ढाई माह से उन्हें परेशान कर रहे हैं। आरोप लगाया गया था कि अधिकारी दबाव बना रहे हैं कि कुटेल एरिया के राइस मिलर्स से 5 लाख और पूरे करनाल जिले के राइस मिलर्स से 20 लाख रुपये एकत्र करके दिए जाएं। अगर ऐसा नहीं किया गया तो राइस मिलर्स को धान की फिजिकल वेरिफिकेशन में फंसवाने की धमकी दी गई। इस मामले की रिकॉर्डिंग करके रहेजा ने जिला प्रशासन को भी दी थी। इस पर कार्रवाई करते हुए मार्केटिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक मनदीप बराड़ ने पांचों आरोपी अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड किया था, साथ ही इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक एक्ट के तहत केस भी दर्ज किया गया।
इनमें एमडीओ सुनील शर्मा, डीएमईयू (जिला मार्केटिंग प्रवर्तक अधिकारी) सौरभ सिंह, सचिव आशा रानी, मंडी सुपरवाइजर अरविंद कुमार, ऑक्शन रिकॉर्डर सतबीर सिंह के नाम शामिल हैं। हाईप्रोफाइल मामला होने के कारण तत्कालीन एसपी जशनदीप सिंह रंधावा ने मामले में एसआईटी बनाई। इसमें डीएसपी हैड क्वार्टर व सीआईटू के इंचार्ज जसविंद्र ढिल्लो समेत एक अन्य अधिकारी को शामिल किया गया। जांच इतनी धीमी चली कि 9 मई को पहला आरोपी अरविंद कुमार एसआईटी के काबू आ सका। अरविंद कुमार को गिरफ्तार करके रिमांड पर लिया गया तो बाद में उसे जेल भेज दिया गया। इसके बाद से फिर से इस फाइल पर धूल जम गई। धीरे-धीरे जांच आरोपियों को गिरफ्तार करने बजाय आरोपियों को बचाने की दिशा में चल पड़ी। एक माह पहले अंदर खाते तीन अधिकारियों को मौखिक रूप से क्लीनचिट तक थमा दी गई। हालांकि, अभी तक पुलिस इस बात को भी खुल कर नहीं बता पा रही है कि इस मामले में कौन दोषी है और कौन निर्दोष। जांच के नाम पर इस मामले को सात माह से लंबा खींचा जा रहा है।

गिरफ्तारी के नाम पर पुलिस के पास नहीं कोई जवाब
इस बारे में डीएसपी रमेश चंद ने बताया कि मामले की पूरी गंभीरता से जांच की जा रही है। एक आरोपी को गिरफ्तार किया चुका है, शेष के इस मामले में शामिल होने के दस्तावेज एकत्र करने में समय लगा है। कागजों के आधार पर ये कहा जा सकता है कि इस मामले में अरविंद कुमार के साथ डीएमईओ सौरभ कुमार की सीधी सीधी इनवोलमेंट थी, शेष तीन के बारे में सबूत नहीं मिले हैं। सबूतों के आधार पर ही कार्रवाई की जा रही है। सौरभ कुमार को कब गिरफ्तार किया जाएगा, इस बारे में डीएसपी के पास कोई जवाब नहीं है। डीएसपी रमेश चंद का कहना है कि, मेरी जांच में सौरभ कुमार दोषी है और उसको जल्द काबू किया जाएगा।

अब डीएसपी राजीव करेंगे जांच
एसआईटी की जांच में डीएमईओ सौैरभ कुमार की इनवोलमेंट सामने आने पर सौरभ कुमार ने अब इस जांच पर आपत्ति जताई है, साथ ही पुलिस के आला अधिकारियों को शिकायत देकर मामले की जांच दूसरे डीएसपी से कराने की मांग की है। अब इस मामले की जांच डीएसपी राजीव कुमार के नाम कर दी गई है। वो इस मामले को फिर से तफ्तीश करेंगे, ऐसे में समय और ज्यादा लगेगा। इस बारे में एसआईटी के इंचार्ज डीएसपी रमेश चंद ने बताया कि डीएमईओ सौरभ की शिकायत पर जांच बदली गई है।
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ये हैं अमर उजाला के सवाल
- क्या अरविंद कुमार अकेले ही 20 लाख रुपये की मांग कर रहा था?
- राइस मिलर्स राजेंद्र रहेजा 16 रिकॉर्डिंग हैं, इनमें अरविंद साफ साफ कह रहा है कि उस पर पैसे मांगने का दबाव है?
- रिकॉर्डिंग में सौरभ कुमार रहेजा के मिल में चेकिंग के पहुंचते हैं और फोन पर बात करते हैं।
- एसडीओ सुनील शर्मा समेत अन्य अधिकारी करनाल क्या करने आये थे?
- राइस मिलर्स ने अपनी शिकायत में सचिव आशा रानी का भी पैसे मांगने वालों में नाम लिखा है?
- सवाल ये भी है कि डीएमईओ सौरभ कुमार की ड्यूटी पंचकूला है तो वे करनाल किस अधिकारी के कहने पर यहां आए।

चार आरोपी हो चुके बहाल, शिकायतकर्ता को नहीं है ऐतराज
पिछले माह मार्केटिंग बोर्ड ने अरविंद कुमार को छोड़कर शेष चारों अधिकारियों को अंडर एक्वायरी बहाल कर दिया। ऐसे में जो अधिकारी पिछले छह माह से फरार चल रहे थे, अब वे लगातार ऑफिस में आ जा रहे हैं, लेकिन एसआईटी को नहीं मिल रहे हैं। एसआईटी द्वारा कई बार छापेमारी के दावे भी किए गए हैं, लेकिन अर विंद के अलावा कोई काबू नहीं आया है। हालांकि, कुछ दो माह पहले आरएसएस के नेता के घर पर समझौते को लेकर दोनों पक्षों की बैठक भी हुई थी। उधर, इस बारे में शिकायतकर्ता राजेंद्र रहेजा का कहना है कि उन्होंने किसी के साथ कोई समझौता नहीं किया है, वे कानून में विश्वास रखते हैं। हमने शिकायत दी थी, कार्रवाई पुलिस को करनी है।
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