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जिनके खिलाफ होनी थी चार्जसीट, उन्हें थमा दी मलाईदार सीट

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल।
करनाल मार्केट कमेटी के इंटरनल ऑडिट के दौरान पकड़ी गई करोड़ों रुपये की गड़बड़ी के मामले में हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने संबंधित सचिवों और अकाउंटेंट आदि के खिलाफ चार्जशीट करने के आदेश जारी किये, लेकिन मिलीगत के चलते ये चार्जशीट (आरोप पत्र) ढाई साल तक तैयार नहीं की गई। गड़बड़ी के आरोपियों को बचाने के लिए इन आदेशों को भी दबा दिया गया। इससे भी बड़ी बात ये है कि विभाग की तरफ से कार्रवाई तो दूर की बात है कि इन सभी अधिकारियों को कर्मचारियों को उसी मार्केट कमेटी सचिव अन्य मार्केट कमेटियों में मलाईदार सीटों पर बैठाकर तोहफा दिया गया।
गौरतलब है कि वर्ष 2015 में प्रदेश सरकार की ओर से मार्केट कमेटी में भ्रष्टाचार की बू आने पर स्पेशल ऑडिट के आदेश दिए गए थे। तीन सदस्यीय कमेटी ने वर्ष 2012-13 से 2014-15 के कार्यकाल का ऑडिट किया था। इसमें करीब दो करोड़ रुपये की फर्जी रसीदें काटी गईं थीं, साथ ही 63 प्लॉट को शर्तें पूरी नहीं करने पर गलत तरीके से बहाल करना पाया था। इसके अलावा भी ऑडिट टीम ने भारी मात्रा में वित्तीय अनियमितताएं और रिकॉर्ड मेंटेन नहीं करने आदि की खामियां पकड़ीं थीं। स्पेशल ऑडिट टीम की रिपोर्ट के आधार पर मार्केटिंग बोर्ड के तत्कालीन मुख्य प्रशासक संबंधित 10 अधिकारियों और कर्मचारियों को शोकाज नोटिस जारी किये थे, साथ ही ये भी कहा था कि क्यों न उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, मामला गंभीर और बड़ा होने के कारण दसों कर्मचारियों को चार्जशीट करने के आदेश वर्ष 2015 में ही दिये गए थे। बावजूद इसके संबंधित अधिकारियों का आरोप पत्र तैयार नहीं किया गया। ऐसे में विभाग द्वारा इन सभी अधिकारियों को अच्छी सीटों पर रखा गया और आज भी ये अधिकारी उन्हीं सीटों पर विराजमान हैं। सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर क्यों नहीं अधिकारियों ने इनके खिलाफ चार्जशीट तैयार की और किसकी शह पर आज तक ये अधिकारी बचते आए हैं?
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विभाग बताने को तैयार नहीं
इस मामले को लेकर हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। करनाल मंडी के अधिकारी तो जुबान ही नहीं खोलते। चार्जशीट हुई या नहीं हुई, क्यों नहीं हुई आदि के सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है। इस मामले में बोर्ड के मुख्य प्रशासक मनदीप सिंह बराड़, हरियाणा के सचिव जयदीप सिंह से बात करने की कोशिश की, लेकिन फोन नहीं उठाए। सवाल ये है कि आखिर ये पूरे मामले को विभाग दबाने की कोशिश क्यों कर रहा है।

इनके खिलाफ होनी थी चार्जशीट
स्पेशल ऑडिट टीम की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2012-13 और 2014-15 तक कुल दस अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं। इनमें तत्कालीन मार्केट कमेटी सचिव राजीव चौधरी, महाबीर सिंह, राकेश रावल, नरेश मान, राममेहर जागलान, रमेश गोयल, सुंदर सिंह और वंदना के नाम शामिल हैं। इनके साथ ही आक्शन रिकॉर्डर रघुबीर सिंह, अकाउंटेंट पंकज तूली भी शामिल हैं।

अब किसको कौन सी मिली सीट
कार्रवाई की बजाय विभाग ने इन अधिकारियों को अच्छी जगह पर पोस्टिंग दी है। इस समय महाबीर सिंह करनाल मार्केट कमेटी में डीएमईओ हैं, जबकि आज भी पंकज तूली करनाल मंडी में ही अकाउंटेंट हैं। नरेश मान घरौंडा मार्केट कमेटी के सचिव और सुंदर सिंह को इंद्री कमेटी सचिव हैं। इसी प्रकार, वंदना को जुंडला मार्केट कमेटी में हैं। रमेश गोयल डीएमईओ पंचकूला, राजीव चौधरी डीएमईओ कुरुक्षेत्र, राकेश रावल, सहायक सचिव पटौदी और राममेहर जागलान, सचिव सफीदो हैं।

माह पहले भेजी है चार्जशीट : जेडए
इस बारे में जोनल एडमिनिस्ट्रेर डॉ. सुशील मलिक ने बताया कि इंटरनल ऑडिट के दौरान पकड़ी गई गड़बड़ी को संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की डेढ़ माह पहले ही चार्जशीट तैयार करके हेड ऑफिस भेजी जा चुकी है। इस बारे में हेड ऑफिस ही कुछ बता सकता है कि चार्जशीट पर क्या रहा?

हुए थे चार्जशीट के आदेश : सांगवान
स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर उसी समय मुख्य प्रशासक की ओर से संबंधित दसों अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट के आदेश दिये गए थे। इसके बाद चार्जशीट की गई या नहीं, इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है। -राजेश सांगवान, अकाउंटेंट एंड फाइनेंस चीफ, बोर्ड, पंचकूला।
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कराएंगे मामले की जांच : ओपी धनखड़
ये मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर इस प्रकार की कोई फाइल दबाई गई है तो उसकी जांच कराई जाएगी। साथ ही पूरे मामले का पता लगाया जाएगा आखिर कहां पर गड़बड़ी रही। सरकार जीरो टोलरेंस पर काम कर रही है। गलत कार्य व भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
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