संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। हाईकोर्ट के आदेश के बाद शनिवार को नगर निगम के वार्ड नंबर 22 की बैंक कॉलोनी के राजीव गार्डन की गली का निर्माण शुरू हो गया। गली निर्माण के लिए कॉलोनी निवासी रिटायर्ड ईटीओ हरिराम ने एडवोकेट रुपेंद्र सिंह बांगड़ के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 24 जनवरी को मामले में सुनवाई करते हुए नगर निगम को दो माह के भीतर गली का निर्माण पूरा कराने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद शनिवार को गली का निर्माण कार्य शुरू किया गया। याचिकाकर्ता के एडवोकेट रुपेंद्र सिंह बांगड़ ने जेसीबी पर नारियल फोड़ कर गली निर्माण शुरू कराया। एडवोकेट रुपेंद्र सिंह ने बताया कि दिसंबर 2018 में हुए नगर निगम चुनाव में आजाद उम्मीदवार जसविंदर बांगर से चुनावी रंजिश के चलते गली का निर्माण नहीं होने दिया। हालांकि गली का टेंडर 2020 में हो चुका था। गली का आधा निर्माण हो गया था। लेकिन जसविंद्र बांगर, हरिराम व अन्य के घर के आसपास गली का निर्माण नहीं होने दिया गया। आसपास की गलियों का निर्माण भी पूरा हो गया था। लेकिन इसका निर्माण नहीं किया गया। इस बारे में उन्होंने 29 बार संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी थी, लेकिन फिर भी गली का निर्माण शुरू नहीं कराया गया। जिसके बाद कॉलोनी निवासी रिटायर्ड ईटीओ हरिराम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील रुपिंद्र सिंह बांगर बताया हरिराम की पत्नी कैंसर से पीड़ित है। चिकित्सकों ने उनको नियमित रूप से सैर करने की हिदायत दी हुई है लेकिन गली कच्चा होने के कारण घर से नहीं निकल पाती। इसलिए उनके माध्यम से उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने पूरे साक्ष्यों के साथ हाईकोर्ट में अपनी बात रखी। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता देखते हुए नगर निगम अधिकारियों को 60 दिन में गली का निर्माण पूरा कर पूर्णता प्रमाण पत्र जमा करवाने के आदेश दिए थे। शनिवार को गली का निर्माण शुरू होने पर प्रभावित लोगों ने खुशी जताई।
दाे साल से अधर में था गली का निर्माण
याचिकाकर्ता हरि राम ने कहा कि वह बैंक कॉलोनी के राजीव गार्डन में रहता है। साल 2022 में उनकी गली का निर्माण शुरू हुआ था। लेकिन नगर निगम द्वारा बीच में गली का निर्माण रोक दिया था। गली को पूरा बनाए बिना ही निगम के ठेकेदार अपना सामान समेट कर चले गए थे। जबकि आसपास की गलियों का निर्माण किया गया था। गली निर्माण के लिए नगर निगम अधिकारियों को बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद सुनवाई नहीं की गई। मजबूर होकर उनको कोर्ट का रास्ता अख्तियार करना पड़ा। जिसके बाद अब गली का निर्माण शुरू हो पाया।