- फर्जी दस्तावेज जमा करा दिल्ली की कंपनी ने हासिल किया था 26 करोड़ का काम
- फर्जीवाड़े का पता चलने पर चंडीगढ़ मुख्यालय ने कंपनी को किया ब्लैक लिस्ट
- करनाल में भूमिगत लाइन बिछाने का सौंपा गया था काम
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। बिजली निगम में दिल्ली की कंपनी ने फर्जी दस्तावेज लगाकर करोड़ों रुपये की निविदा अलॉट करा ली। जब कंपनी के फर्जीवाड़े का चंडीगढ़ मुख्यालय में अफसरों को पता चला तो उन्होंने कंपनी के दस्तावेजों का सत्यापन किया। जांच में दस्तावेज फर्जी मिलने पर कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। कंपनी के ब्लैक लिस्ट होने पर करनाल में भूमिगत लाइन की परियोजना लटक गई है।
अब नए सिरे से टेंडर अलॉट करने की योजना बिजली निगम द्वारा बनाई जा रही है। बताते हैं कि करनाल में बिजली निगम ने सड़कों के किनारे जा रहे तारों को भूमिगत करने की योजना बनाई थी। लंबे समय से इस परियोजना पर काम चल रहा था। कई कंपनियों ने करोड़ों की इस परियोजना को लेने के लिए आवेदन किया मगर दिल्ली के फजलगढ़ की ग्लोबल इलेक्ट्रिकल कंपनी को टेंडर अलॉट किया गया। टेंडर अलॉट करते समय कंपनी द्वारा लगाए गए दस्तावेजों की जांच तक नहीं की गई। बाद में कंपनी के फर्जी दस्तावेजों की भनक लगने पर सत्यापन किया गया। जिसमे कंपनी के जरिए लगाए गए दस्तावेज फर्जी पाए गए।
चंडीगढ़ से दिल्ली की ग्लोबल इलेक्ट्रिकल कंपनी को 26 करोड़ की परियोजना का टेंडर अलॉट कर दिया गया। इस कंपनी के ठेकेदार ने करनाल के कुंजपुरा रोड पर बिजली की लाइनों को भूमिगत करने का काम भी शुरू कर दिया। ट्रांसफार्मर के लिए करीब 10 से 12 चबूतरे में भी बना दिए गए। कंपनी जल्द काम पूरा करने में लगी थी। जबकि यह परियोजना नौ माह में पूरी की जानी थी। ब्लैक लिस्ट होने के बाद करनाल से परियोजना छोड़कर भाग गई।
सड़कों से हटाए जाने थे खंभे और तार
बिजली निगम के अधिकारियों के मुताबिक परियोजना के तहत पहले मेरठ चौक से मीरा घाटी चौक और अस्पताल चौक से महात्मा गांधी चौक तक का काम पूरा किया जाना था। सड़कों के किनारे खड़े खंभे और तारों को हटाकर भूमिगत लाइन बिछाई जानी थी। इस परियोजना के साथ-साथ सुंदरीकरण भी होना था। मगर कंपनी के ब्लैक लिस्ट होने के बाद परियोजना का कार्य रुक गया।
करनाल में भूमिगत बिजली लाइन का टेंडर दिल्ली की कंपनी को अलॉट किया गया था, मगर जांच में फर्जी दस्तावेज मिलने पर कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया गया है। अब नए सिरे से टेंडर अलॉट करने के बाद ही परियोजना को पूरा किया जाएगा।
- कशिक मान, अधीक्षण अभियंता बिजली निगम करनाल