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सीएम का संदेश : संवेदनशीलता बड़ा गुण, नैतिकता कभी न छोड़ें

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सीएम का संदेश : संवेदनशीलता बड़ा गुण, नैतिकता कभी न छोड़ें
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- हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन में आयोजित नैतिकता सम्मेलन को सीएम ने किया संबोधित
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माई सिटी रिपोर्टर
घरौंडा/मधुबन/करनाल। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि इंसान में संवेदनशीलता सबसे बड़ा गुण होता है और इसी के बूते इंसान जीवन में उन्नति की ओर अग्रसर होता है। अपनी सोच और दृष्टिकोण को बदलकर ही नैतिकता के रास्ते पर चला जा सकता है मगर इसमें भ्रष्टाचार सबसे बड़ी रुकावट होती है। लिहाजा हमें भ्रष्टाचार से परे अपनी नैतिकता को नहीं छोड़ना चाहिए। हम स्वयं को यदि आदर्श के रूप में स्थापित करना चाहते हैं तो अपनी सकारात्मक सोच और नैतिकता से दूसरों को भी बदलने का प्रयास करना होगा।
मुख्यमंत्री बुधवार को हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन में मिशन कर्मयोगी अभियान के तहत हिपा की ओर से आयोजित नैतिकता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने भी संबोधित किया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के साढ़े तीन लाख कर्मचारियों में से दो लाख इस प्रशिक्षण से लाभान्वित हो चुके हैं, शेष को भी 31 मार्च तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अधिकारी और कर्मचारियों के दृष्टिकोण को सही दिशा में ले जाना है ताकि हरियाणा को भी विकास की सही दिशा में ले जाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने मिशन मेरिट के तहत अधिकारी और कर्मचारियों की भर्ती की, जिसका कई बार विरोध भी झेलना पड़ा, लेकिन उसके परिणाम सबके सामने है कि योग्य और पात्र युवा ही सरकारी नौकरियों में आ रहे हैं। मौके पर घरौंडा विधायक हरविंद्र कल्याण, भाजपा जिलाध्यक्ष योगेंद्र राणा, गृह सचिव व वित्तआयुक्त टीवीएसएन प्रसाद, पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल, सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक मनदीप सिंह बराड़, हरियाणा पुलिस अकादमी के निदेशक डॉ. सीएस राव, उपायुक्त अनीश यादव, पुलिस अधीक्षक शशाक कुमार सावन आदि मौजूद रहे।
प्रेरक वचन का किया शुभारंभ
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 40 एवी बूस्टर नामक प्रेरक वचन का भी शुभारंभ किया। यह प्रेरक वचन मुख्यमंत्री के साथ-साथ गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज व कई अन्य विद्वानों के प्रेरक वचन होंगे, जो प्रदेश के सभी कर्मचारियों तक पहुंचाए जाएंगे।
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अच्छाई शुरुआत में कठिन होती है : स्वामी ज्ञानानंद
नैतिकता सम्मेलन में पहुंचे गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता का व्यावहारिक ज्ञान यही है कि हमारे आचरण में वह बातें सिद्ध हों जो हम गीता से सीख कर अपने दैनिक जीवन में उतारते हैं। ज्ञान की पूर्णता तभी प्रकट होती है जब संघर्ष सामने हो। अच्छाई बुराई श्रेयस और प्रेयस का भी तब ही पता चलता है। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि बुराई प्रारंभ में अच्छाई लगती है, लेकिन उसका परिणाम हमेशा बुरा होता है। इसी तरह अच्छाई शुरुआत में कठिन होती है, लेकिन उसका परिणाम हमेशा अच्छा रहता है। इसके लाखों उदाहरण आज समाज में दिखाई देते हैं। हमें अपने जीवन प्रबंधन में भी गीता को उतारना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी नित्य रूप से गीता का पाठ करते हैं। उन्होंने भी कर्म योगी बनने के सिद्धांत को सोच और दृष्टिकोण को बदलने के लिए कहा है। सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि हिपा की महानिदेशक चंद्रलेखा मुखर्जी पहुंचीं।
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