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Karnal News: शहर की बिजली व्यवस्था होगी स्मार्ट

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शहर की बिजली व्यवस्था होगी स्मार्ट
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- बिजली निगम बनाएगा रिंग मेन यूनिट, खामी आने पर नहीं जाएगी बिजली
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- स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर में स्थापित होंगे कॉम्पैक्ट विद्युत सब स्टेशन
- करीब 27 करोड़ रुपये की आएगी लागत
कुशाग्र मिश्रा
करनाल। शहर की बिजली व्यवस्था स्मार्ट होने जा रही है। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत चंडीगढ़ की तर्ज पर बिजली के खंभों से तारों को हटाकर भूमिगत किया जाएगा और रिंग मेन यूनिट (आरएमयू) स्थापित की जाएगी। आरएमयू का फायदा यह होगा कि तकनीकी खराबी आने पर भी बिजली आपूर्ति ठप नहीं होगी, वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित हो जाएगी। इसके साथ ही कम भूमि लेने वाले स्वचालित काॅम्पैक्ट विद्युत सब स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
बिजली निगम इस परियोजना पर करीब 27 करोड़ रुपये खर्च करने जा रहा है। इसकी निविदा जारी कर दी गई, जल्द इस पर काम शुरू होने की उम्मीद है। निविदा और फिर कार्यादेश जारी होने के बाद करीब एक वर्ष में इस काम को पूरा किया जा सकेगा। इस परियोजना के तहत मेरठ चौक से मीराघाटी चौक, एनडीआरआई से पुराना कमेटी चौक, घंटाघर से पुरानी सब्जी मंडी मुख्य बाजार और सिविल अस्पताल से महात्मा गांधी चौक तक 11केवी और एलटी विद्युत तारों को भूमिगत किया जाएगा। विद्युत तारों को भूमिगत करने के लिए ट्रेंचलेस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
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इस तकनीक में प्रवेश और निकास बिंदु पर छोटे गड्ढे करने के अलावा सड़क या फुटपाथ की सतह को तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऐसे में पूरी सड़क या फुटपाथ को उखाड़ना नहीं पड़ेगा। साथ ही कॉम्पैक्ट सब स्टेशन स्थापित किए जाएंगे और रिंग मेन यूनिट बनाई जाएगी।
रिंग मेन यूनिट बनने से यह होगा फायदा
रिंग मेन यूनिट (आरएमयू) कहीं खामी आने की स्थिति में मरम्मत के दौरान शहर के लोगों को निरंतर बिजली आपूर्ति प्रदान करेगा। यानि खामी की वजह से शहर के लोगों को बिजली संकट नहीं झेलना पड़ेगा। रिंग मेन यूनिट एक स्वचालित गियर है। जिससे शहर के विभिन्न विद्युत सब स्टेशनों से आ रही बिजली आपूर्ति की लाइन जुड़ी होगी। इसका लाभ यह है कि किसी एक क्षेत्र की बिजली की लाइन में खराबी आने पर रिंग मेन यूनिट से जुड़ी दूसरी विद्युत लाइन से बिजली की आपूर्ति प्रभावित क्षेत्र में स्वत: होने लगेगी। यानि एक लाइन से हो रही बिजली आपूर्ति दूसरी लाइन में स्थानांतरित हो सकेगी।

काम्पैक्ट सब स्टेशन लेंगे कम भूमि
विद्युत सब स्टेशन के जरिए ही शहर में बिजली वितरण सुनिश्चित किया जाता है। एक पारंपरिक 33 केवी का सब स्टेशन स्थापित करने में चार हजार वर्ग फुट भूमि की जरूरत होती है। भूमि की उपलब्धता सबसे बड़ी समस्या है। इस समस्या से कॉम्पैक्ट सब स्टेशन छुटकारा दिलाएंगे। पारंपरिक विद्युत सब स्टेशनों की तुलना में एक कॉम्पैक्ट सब स्टेशन के लिए महज 2400 वर्ग फुट भूमि की ही आवश्यकता है। कॉम्पैक्ट सब स्टेशन को बिजली वितरण की जरूरतों के लिहाज से 11केवी के साथ ही 33 से 66 तक की क्षमता के लिए बनाया जा सकता है। यह डिजिटल सिस्टम से लैस होगा और आपात स्थिति के लिए स्वचालित अलार्म सिस्टम से भी लैस होगा।
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स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बिजली वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाया जा रहा है। इसके लिए निविदा जारी कर दी गई है, कार्यादेश जारी होने पर इस पर काम शुरू होगा। शहर के लोगों को निर्बाध बिजली आपूर्ति का लाभ मिलेगा।
- कशिश मान, अधीक्षण अभियंता, बिजली निगम
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