भगवान सूर्य और छठी माता को समर्पित महापर्व छठ हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। शुक्रवार को नहाय खाय के साथ छठ पर्व पूजा की शुरुआत हो गई है। पर्व के लिए लोगों ने बाजारों में जमकर खरीदारी करनी शुरू कर दी है। शुक्रवार को पुरानी सब्जी मंडी में छठ पूजा के लिए सूप, टोकरी पूजा का सामान फल और गन्ने के साथ साथ सजावट का सामान और शृंगार का सामान श्रद्धालु खरीदा।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार से चार दिवसीय छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से शुरू हुई। इस कठिन पर्व में व्रती को लगभग 36 घंटे तक निर्जल व्रत रखना होता है। छठ पर्व सेवा समिति मंडल के प्रधान सुरेश कुमार यादव ने बताया कि छठ पूजा में षष्ठी मैया और सूर्यदेव की पूजा होती है। इस पर्व को संतान, सुख और समृद्धि के लिए रखा जाता है। कार्तिक माह की चतुर्थी तिथि को पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते सूर्य और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद व्रत का पारण यानी समापन किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस दिन व्रती नदी में स्नान करते हैं और दिन में सिर्फ एक ही बार खाना खाते है।
नहाय-खाय वाले दिन महिलाएं घर की साफ-सफाई करती हैं और इस दिन हर घर में लौकी या कद्दू की सब्जी बनाई जाती है। छठ पर्व सेवा समिति मंडल के प्रचार मंत्री दिलीप कुमार ने बताया कि सूर्य मंदिर छठपर्व सेवा समिति मंडल की ओर से छठ पूजा के लिए पश्चिमी यमुना नहर के दोनाें किनारों पर बने घाटों पर तैयारी कर दी गई। 29 अक्तूबर को खरना होगा। इसके बाद 30 अक्तूबर को संध्या अर्घ्य और 11 अक्तूबर को निकलते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।