Dr. Rakesh Bhardwaj
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मीनू बांगड़।
करनाल। रसायनशास्त्री एवं प्राचार्य डा. राकेश भारद्वाज ने कहा है कि गेहूं कटाई के बाद खेतों में फाने जलेंगे तो अधजले कार्बन कण हवा में तैरेंगे। जिससे कार्बन डाइआक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, सल्फर डाइआक्साइड गैसों का उत्सर्जन होगा। जिससे वातावरण में बदलाव होगा। इसके साथ एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ेगा। 2.5-पीएम और 10-पीएम माइक्रो मिलीमीटर के साइज के कण की मात्रा पर्यावरण में बढ़ जाएगी। यह कण अनेक तरह के घातक जीवाणुओं के पनपने में सहायक सिद्ध होंगे। जिसमें कोविड-19 का वायरस और कई श्रेणी के वायरस भी सहायक सिद्ध होंगे। इसलिए आवश्यक है कि किसान किसी भी सूरत में गेहूं के अवशेषों को नहीं जलाएं। उन्होंने कहा कि अक्तूबर व नवंबर में धान के अवशेष जलाने से जहरीली गैसों का उत्सर्जन हुआ तथा धुंध के वितरित होने से स्मॉग बन गया था। जिस वजह से दिल्ली के आसपास तथा समीप लगते सभी जिलों में लगभग 250 किलोमीटर वर्ग क्षेत्र में स्मॉग का गुब्बार बन गया था। वातावरण में एक्यूआई का स्तर 550 से भी पार कर गया था। उस समय भी लॉकडाउन जैसी स्थिति बनी और स्कूलों की छुट्टियां कर दी गई थी। जिससे जनजीवन पूर्ण रूप से प्रभावित हुआ। इस तरह की पुनरावृत्ति दोबारा नहीं हो तथा हानिकारक बैक्टीरिया व वारयस नहीं पनपे। यह अति आवश्यक है कि किसान अपने गेहंू व सरसों के अवशेषों को नहीं जलाएं। सरकार की ओर से चलाई जा रही लॉकडाउन की प्रक्रिया में किसानों द्वारा यह बहुत बड़ा सहयोग होगा।