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Karnal News: वाल्मीकि बस्ती पर चला बुलडोजर, 20 घर तोड़े, भड़के लोग

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करनाल। हरियाणा- पंजाब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने एक बार फिर मॉडल टाउन सेक्टर 12 की वाल्मीकि बस्ती को खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। ये बस्ती अनधिकृत रूप से करोड़ों रुपये कीमत वाली भूमि पर बसी बताई जा रही है।
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कोर्ट ने अब भूमि को खाली कराने के आदेश दिए हैं। जिस पर एचएसवीपी के अधिकारियों ने भारी पुलिस बल के साथ बस्ती को खाली कराने के लिए भवनों को तोड़ना शुरू कर दिया। जिससे यहां खलबली मच गई। बस्ती के लोगों ने भारी विरोध किया। कांग्रेसी नेताओं ने भी पहुंचकर बस्ती वालों के घरों को उजाड़ने का विरोध किया लेकिन देर शाम तक चली गई कार्रवाई में करीब 20 घरों को तीन जेसीबी व व्यक्तिगत तौर पर ध्वस्त कर दिया गया। घरों के सामान को बाहर निकाल दिया गया।
कोर्ट के आदेश पर वाल्मीकि बस्ती को खाली कराने के लिए एचएसवीपी के स्टेट अफसर एवं एसडीएम अनुभव मेहता, कार्यकारी अभियंता धर्मवीर मेहला, ड्यूटी मजिस्ट्रेट बीडीपीओ करनाल व जिला समाज कल्याण अधिकारी की मौजूदगी में करीब पचास से अधिक कर्मचारियों ने सुपरवाइजर भीम सिंह के नेतृत्व में तीन जेसीबी के साथ कार्रवाई शुरू की।
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इस दौरान पूरी साज-सज्जा के साथ भारी पुलिस बल, जिसमें महिला पुलिस भी शामिल थी तैनात की गई। घरों की तोड़फोड़ शुरू हुई तो पूरी बस्ती में खलबली मच गई। लोग जेसीबी के सामने आकर विरोध करने लगे तो पुलिस ने उन्हें हटाया। इसी दौरान यहां क्षेत्रीय पार्षद व कांग्रेस की पूर्व विधायक सुमिता सिंह आदि भी पहुंच गई। गरीबों को घरों को तोड़ने पर हरियाणा सरकार के खिलाफ कड़ी नाराजगी जाहिर की। कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। जब अधिकारियों ने हाईकोर्ट का आदेश दिखाया, तो भी लोग नहीं माने तो पुलिस ने भीड़ को हटाया।
एसडीएम अनुभव मेहता ने बताया कि करीब 15 घरों को जेसीबी से तोड़ा गया, कुछ घर कर्मचारियों ने व्यक्तिगत तौर पर तोड़े तो कुछ लोगों ने स्वयं ही अपने घरों का सामान हटा लिया। तोड़ने से पहले लोगों का सामान कर्मचारियों के माध्यम से भी बाहर निकलवाया गया। बस्ती वालों को स्वयं जमीन खाली करने के लिए शनिवार व रविवार का समय दिया गया है। यदि खाली नहीं किया तो सोमवार को फिर जेसीबी से जमीन खाली कराने की कार्रवाई की जाएगी।



क्या हैं मामला
एचएसवीपी के अधिकारियों के अनुसार वर्षों पहले कुछ लोग मॉडल टाउन में आकर बसे थे, लेकिन धीरे धीरे सैकड़ों परिवार एचएसवीपी की खाली पड़ी भूमि पर झोपड़ियां बनाकर रहने लगे। ये संख्या लगातार बढ़ती हुई, सेक्टर 12 में एचएसवीपी कार्यालय के दूसरी तरह भी आ गई। यहां एचएसवीपी ने पहले की प्लाॅटिंग कर रखी थी। जिस पर आवंटियों ने अपनी आलीशान कोठियां बना ली। कोठी के लोग कोर्ट चले गए। अब कोर्ट ने एचएसवीपी को बस्ती खाली कराने के आदेश दिए। 2013 में एचएसवीपी ने बायोमीट्रिक सर्वे कराया तो उसमें 259 झोपड़ियां व घर पाए गए। जब जगह खाली नहीं हुई तो 2018 में एचएसवीपी ने वैकल्पिक तौर पर इन सभी परिवारों को सेक्टर 16 में प्लॉट देने के लिए आवेदन मांगे। 238 आवेदन आए, जिसमें 13 निरस्त हो गए। 225 को प्लाॅट आवंटित कर दिए गए, लेकिन 77 ने ही अभी तक वहां घर बनाकर रहना शुरू किया। इन लोगों ने भी वहां अपने झोपड़ी या घर का स्वरूप बदलकर अपने बच्चों को बैठा दिया या फिर किराए पर दे दिया। कुछ ही लोगों ने जमीन खाली की। सेक्टर 16 में आवंटित प्लॉटों में 41 रह रहे हैं, 52 की डीपीसी, पूर्ण बने हैं 30, पूर्णत: खाली 70, छत तक बने 27, जबकि तीन अधूरे हैं। इतने सब कुछ के बावजूद बस्ती खाली नहीं हो सकी है, बस्ती में अभी भी करीब 250 से अधिक हैं।

एचएसवीपी के सीए को किया कोर्ट ने तलब
पिछले महीने इसी मामले की सुनवाई में एचएसवीपी के स्टेट अफसर को जमीन नहीं खाली कराने, चहारदीवारी नहीं बनाने से नाराज होकर दिनभर कोर्ट में ही बैठा लिया था, जब चहारदीवारी की दीवार बनने का फोटो कोर्ट को दिखाया गया तो स्टेट अफसर को बाहर आने की इजाजत मिली। अब 10 अप्रैल को कोर्ट ने एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है।
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