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Karnal News: मेडिकल कॉलेज में बोन मैरो टेस्ट शुरू, ब्लड कैंसर मरीजों को मिलेगा लाभ

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- शरीर में डब्ल्यूबीसी, आरबीसी और प्लेटलेट्स सहित ब्लड कैंसर की मिलेगी जानकारी
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- शरीर में नया खून और प्लेटलेट्स न बनने के कारण जान सकेंगे विशेषज्ञ
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में शरीर में पनप रहे ब्लड कैंसर, प्लेटलेट्स व रक्त न बनने से संबंधित बोन मैरो टेस्ट की सुविधा शुरू हो चुकी है। ऐसे में अब जिले के मरीजों को बोन मैरो टेस्ट करवाने के लिए रोहतक या चंडीगढ़ नहीं जाना पड़ेगा। इसके साथ ही पीजीआई में लंबे समय तक की मिलने वाली वेटिंग से भी छुटकारा मिलेगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने पैथोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. अतुल बेनीवाल को बोन मैरो टेस्ट की जिम्मेदारी सौंपी है।

प्रो. डॉ. अतुल बेनीवाल ने बताया कि बोन मैरो टेस्ट के अंतर्गत शरीर में सफेद रक्त कोशिकाएं (डब्ल्यूबीसी), लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी), प्लेटलेट्स सहित शरीर में पनप रहे ब्लड कैंसर की जांच हो सकेगी। इस टेस्ट से शरीर में नया खून क्यों नहीं बन पा रहा है और प्लेटलेट्स क्यों कम हो रही हैं। जिससे मानव शरीर में एनीमिया का इलाज कर रहे डॉक्टर कारण जान सकेंगे और मरीज का उचित समय पर इलाज संभव हो सकेगा।
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उन्होंने बताया कि बोन मैरो टेस्ट दो प्रकार का होता है पहला एस्पिरेट और दूसरा बायोप्सी। बोन मैरो एस्पिरेट टेस्ट दिखाता है कि बोन मैरो में सामान्य और असामान्य कौन-सी कोशिकाएं मौजूद हैं और उनके आकार, मात्रा और अन्य विशेषताओं के बारे में जानकारी देता है। वहीं बोन मैरो बायोप्सी एक ऐसी प्रक्रिया है। जिसमें हड्डियों के अंदर से अस्थि मज्जा का एक छोटा नमूना निकाला जाता है और इसका परीक्षण किया जाता है। इस टेस्ट की प्रक्रिया करीब 30 मिनट तक चलती है।

कैसे होता है बोन मैरो टेस्ट
बोन मैरो का एक छोटा नमूना सिरिंज से जुड़ी एक पतली सुई का उपयोग करके निकाला जाता है। आमतौर पर नमूने रोगी की कूल्हे की हड्डी से लिए जाते हैं। इससे पहले एनेस्थीसिया डॉक्टर की मदद से मरीज को बेहोश किया जाता है। ताकि वह उस समय सोता रहे और दर्द महसूस न हो। उन्होंने बताया कि यह टेस्ट ओपीडी कार्ड के आधार पर भी किया जा सकता है। ओपीडी कार्ड पर आने वाले मरीजों को दो दिन में रिपोर्ट मिल सकेगी।
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कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज की पैथालॉजी लैब में एसोसिएट प्रो. डॉ. अतुल बेनीवाल की देखरेख में बोन मैरो टेस्ट शुरू किया गया है। जिसमें जिले वासियों को अपने शरीर के रक्त विकारों व शरीर में पनप रहे कैंसर का पता चल सकेगा। ऐसे में सीधे तौर पर मरीजों को लाभ मिलेगा।
डॉ. एमके गर्ग, निदेशक, केसीजीएमसी, करनाल
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