- चार पर कांग्रेस ने मजबूत की स्थिति तो पांच सीटों पर भाजपा ने वोट बैंक खिसकाया, मोदी-राहुल समेत कई दिग्गज दिखा चुके दम
- नौ सीटों पर बागी निर्दलीय और इनेलो-बसपा गठबंधन बिगाड़ सकता है सियासी समीकरण
मोहित धुपड़
करनाल। जीटी बेल्ट की कुल 27 विधानसभा सीटों पर सभी सियासी दलों ने जीत के लिए खूब जोरआजमाइश की। अब प्रत्याशी बढ़त को बेताब हैं। मुद्दे हों या सियासी व जातीय समीकरण, सभी प्रत्याशी इन्हीं के बूते अपनी जीत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
जीटी बेल्ट की बात करें तो यहां भाजपा के लिए अपने गढ़ को बचाने और कांग्रेस के लिए पहले से बेहतर करने की लड़ाई है। इसके लिए कांग्रेस ने रणनीतिक ढंग से भाजपा के गढ़ में सेंधमारी की कोशिश भी की। अधिकतर सीटों पर भाजपा और कांग्रेस में ही सीधी टक्कर है मगर कुछेक सीटों पर इनेलो-बसपा गठबंधन और बागी निर्दलीय मुकाबले को तिकोना बना रहे हैं।
हालांकि इस बेल्ट में सभी 36 बिरादरियों के मतदाता मौजूद हैं मगर अधिकतर सीटों पर दबदबा पंजाबियों, वैश्य और एससी समाज का ही दिखता है। कुछेक सीटों पर जाट, ब्राह्मण और रोड़ बिरादरी भी अपना प्रभाव रखती हैं। विधानसभा चुनाव में सभी प्रत्याशियों ने सियासी के साथ-साथ बिरादरियों के समीकरणों को भी बखूबी साधने का प्रयास किया।
इस क्षेत्र में बड़े स्टार प्रचारकों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, यूपी के मुख्यमंंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी, बसपा सुप्रीमो मायावती, आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, आप नेता संजय सिंह, मनीष सिसोदिया, पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, भाजपा नेता अनुराग ठाकुर, शिवराज चौहान, हेमामालिनी, रवि किशन व सचिन पायलट समेत प्रदेश स्तरीय विभिन्न नेताओं ने भी खूब रैलियों, जनसभाओं व रोड शो के सहारे अपने दलों के प्रत्याशियों की जीत के लिए एड़ी चोट का जोर लगाया।
इस बेल्ट में भाजपा और कांग्रेस ने इसी साल मई में हुए लोकसभा चुनाव और वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव के परिणामों के गणित को खंगालते हुए विभिन्न सीटों पर ज्यादा जोर लगाया है। इस क्षेत्र में पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, कैथल और कुरुक्षेत्र सात जिलों की कुल 27 विधानसभा सीटें शामिल हैं। इस साल मई में हुए लोकसभा चुनाव के परिणाम की स्थिति देखें तो करनाल व कुरुक्षेत्र की संसदीय सीट भाजपा और अंबाला सीट कांग्रेस ने जीती थी।
विधानसभा वार देखें तो अंबाला संसदीय क्षेत्र की कालका, पंचकूला, यमुनानगर व अंबाला छावनी सीट से भाजपा को व नारायणगढ़, अंबाला सिटी, मुलाना, साढौरा और जगाधरी सीट से कांग्रेस को बढ़त मिली थी। कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र में रादौर, लाडवा, थानेसर, कैथल व पूंडरी से भाजपा और शाहाबाद, पिहोवा, गुहला व कलायत में कांग्रेस आगे रही थी। करनाल लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत नीलोखेड़ी, इंद्री, करनाल, घरौंडा, असंध, पानीपत ग्रामीण, पानीपत शहरी, इसराना व समालखा इन सभी क्षेत्रों में भाजपा ने अपना झंडा बुलंद रखा था। कुल मिलाकर 18 सीटों पर भाजपा और 9 सीटों पर कांग्रेस आगे रही।
इसी तरह वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव परिणाम की स्थिति पर नजर डालें तो भाजपा 14, कांग्रेस 9, जजपा व आजाद प्रत्याशी 2-2 सीटों पर जीते थे। वर्ष 2019 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा परिणामों में कांग्रेस बढ़त के मामले में 9 सीटों से आगे नहीं बढ़ी लेकिन लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रभाव वाली वाली कुछ सीटों पर कांग्रेस ने सेंध जरूर मारी। इन सीटों में अंबाला सिटी, जगाधरी, पिहोवा व कलायत शामिल हैं। इसी तरह भाजपा ने भी लोकसभा चुनाव के दौरान रादौर, लाडवा, असंध, इसराना और समालखा सीट पर कांग्रेस के वोट बैंक को खिसकाया।
राजनीतिक मामलों के जानकार डाॅ. अवधेश पांडेय बताते हैं कि जीटी बेल्ट में वर्ष 2014 से लेकर मई 2024 के लोकसभा चुनाव तक भाजपा का प्रदर्शन अच्छा रहा है। इसीलिए भाजपा के दिग्गजों का फोकस भी इस बेल्ट में अपना गढ़ बचाने पर है। जाट लैंड, बांगड़ व देशवाली बेल्ट में कांग्रेस खुद को मजबूत मानती है, इसलिए वे अब भाजपा के गढ़ से कुछ सीटें चुराना चाहती है। इसके लिए राहुल व प्रियंका गांधी को यहां रोड शो तक करना पड़ा। डाॅ. पांडेय के अनुसार भाजपा को अपना गढ़ बचाने और कांग्रेस के लिए इसमें सेंधमारी करने की बड़ी चुनौती दिख रही है।
उधर, अंबाला छावनी, पूंडरी, समालखा, पानीपत शहरी, पानीपत ग्रामीण और लाडवा सीट पर बागी हो निर्दलीय चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी व जगाधरी, असंध और कलायत सीट पर इनेलो-बसपा गठबंधन सियासी समीकरण बिगाड़ सकते हैं।