करनाल। देश में धान का रकबा घटने और बौनेपन की बीमारी से हुए भारी नुकसान को देखते हुए केंद्र सरकार ने ब्रोकन राइस (टुकड़ा चावल) के निर्यात पर पूर्ण पाबंदी व गैर बासमती चावल के निर्यात पर 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगा दिया है। जिससे देश के चावल निर्यात को करारा झटका लगा है। इससे चावल निर्यातकों में खलबली मच गई है। निर्यात पुराने ऑर्डर पर न कर पाने और निर्यात घटने से चिंतित हैं। हालांकि कुछ निर्यातकों का कहना है कि सरकार के अचानक लिए गए इस निर्णय से निर्यात तो घटेगा, लेकिन फैसला देशहित में लिया गया है। कुछ निर्यातक इसे सरकार का चीन के खिलाफ कूटनीतिक निर्णय भी मानते हैं, क्योंकि सर्वाधिक ब्रोकन राइस व नॉन बासमती का चावल चीन को ही निर्यात होता है।
भारत से कुल जितना चावल निर्यात होता है, उसका 40 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा से जाता है। हरियाणा में भी करीब 50 प्रतिशत चावल करनाल जिले की तरावड़ी आदि क्षेत्रों से जाता है। वर्ष 2021 में बासमती चावल 42 लाख टन निर्यात हुआ तो नॉन बासमती चावल का निर्यात 172 लाख क्विंटल रहा है। इस साल जुलाई तक ब्रोकन राइस करीब 14 लाख टन निर्यात हो चुका है। अब ब्रोकन राइस (बासमती व गैर बासमती) के निर्यात पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसका सर्वाधिक निर्यात चीन को होता था। इससे सीधे तौर पर देखा जाएगा कि 28 लाख टन चावल का निर्यात नहीं हो पाएगा। इसके अलावा गैर बासमती चावल पर अब 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लग गया है तो कई पूर्व के सौदे खारिज होने की स्थिति बन गई है, नए निर्यात ऑर्डर मिलने में कमी आएगी। क्योंकि भारत के अलावा पाकिस्तान, अमेरिका आदि कई देश चावल निर्यात करते हैं। 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगने से भारतीय चावल अन्य देशों की अपेक्षा महंगा पड़ेगा। यही वजह है कि भारतीय निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है।
भारत से सर्वाधिक चावल का निर्यात चीन व वियतनाम आदि को होता है। भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, थाईलैंड, अमेरिका आदि कई देश चावल निर्यात करते हैं। निर्यात शुल्क बढ़ने से अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में जब अन्य देशों का चावल सस्ता होगा तो जाहिर बात है कि भारत का निर्यात प्रभावित होता। ब्रोकन राइस के पुराने कई ऑर्डर हैं, जो अब पूरे नहीं हो पाएंगे, जिससे निर्यातक फर्मों की छवि प्रभावित होगी। सरकार को प्रतिबंध लगाने से पहले कुछ समय निर्यातकों को देना चाहिए था।
- सुशील जैन, उप प्रधान ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन
भारत से लगातार चावल का निर्यात बढ़ रहा है, लेकिन ब्रोकन राइस पर प्रतिबंध और गैरबासमती के निर्यात पर 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगने से निर्यात तो घटेगा ही। लेकिन विदेशों में भारतीय चावल को काफी पसंद किया जाता है, फिर भी आशंका यही है कि अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में अन्य देशों के मुकाबले भारतीय चावल महंगा हो जाएगा तो कुछ प्रभाव तो पड़ेगा। क्योंकि 20 प्रतिशत काफी अधिक टैक्स है।
- विनोद कौल, निदेशक ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन
ब्रोकन राइस पर प्रतिबंध और गैर बासमती चावल पर 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाने से निर्यात तो प्रभावित होगा, लेकिन यह केंद्र सरकार का देश हित में लिया गया निर्णय है। क्योंकि देश में धान का रकबा 13 प्रतिशत कम हुआ है। बौनेपन की बीमारी ने भी उत्पादन प्रभावित किया है। ऐसी स्थिति में पहले अपने देश की चावल की खपत को पूरा करना आवश्यक है, क्योंकि पहले हम अपना चावल निर्यात कर दें और फिर जरूरत पड़ने पर विदेशों से आयात करें, यह समझदारी नहीं होगी, हमारा ही चावल हमें बहुत महंगा मिलेगा।
- विजय सेतिया, चावल निर्यातक करनाल
Big blow to exporters due to ban on broken rice
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