करनाल। आखिर वही हुआ जिसका किसानों को डर सता रहा था। गेहूं कटाई का कार्य गति पकड़ गया था लेकिन शुक्रवार शाम अचानक गरज के साथ बारिश होने से किसानों के होश फाख्ता हो गए। दिन के समय खेतों में कंबाइन से गेहूं कटाई का काम चल रहा था और शाम को सभी कृषि कार्य बंद हो गए। बार-बार आसमानी बिजली की तेज गर्जना ने दिलों में दहशत पैदा की। बारिश के कारण गेहूं कटाई का कार्य कई दिन के लिए रुक गया है। शाम को तेज आंधी आने से गेहूं की ढेरियों पर रखी तिरपालें भी उड़ गई। अनाज की हिफाजत के लिए किसान दौड़े लेकिन मौसम के आगे बेबस हो गए। फिलहाल दो दिन और बूंदाबांदी की संभावना जताई जा रही है। इससे गेहूं की फसल को काफी नुकसान होगा। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि 18 व 19 अप्रैल को बादल, गरज व चमक के साथ छिटपुट बूंदाबांदी होने के आसार हैं। 20 से 23 अप्रैल तक आंशिक बादल रहेंगे। मौसम की यह स्थिति किसानों के लिए बेहद दुखदायी बन चुकी है। इस बार कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया कि किसान को संभलने का मौका ही नहीं दिया। इस बरसात से गेहूं की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। बाक्स खुले में खेतों में भीगकर सड़ जाएगा अनाज इस बार सरकार ने लॉकडाउन व कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए कई कड़े नियम बनाए। इस बीच कृषि कार्यों को निपटाने के लिए ढील दी गई। लगातार मौसम खराब रहने की वजह से इस बार गेहूं कटाई का काम 12 दिन लेट शुरू हुआ। गेहूं की फसल पकने में समय लगा है। अनाज मंडियों में भीड़ ना हो इसके लिए खरीद केंद्र बनाए गए। लेकिन 20 अप्रैल से पहले खरीद नहीं करने की घोषणा सरकार ने की हुई है। जिन किसानों ने गेहूं की कटाई करवा ली उन्होंने कहीं बरामदे में, पशु बाड़े में या घरों में जगह का प्रबंध अनाज रखने के लिए किया वहीं कुछ ने खेत में तिरपाल बिछाकर उसी पर अनाज की ढेरी लगा दी। अनाज की रात को पहरेदारी का भी इंतजाम किया। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। खेतों में खुले आसमान तले रखा अनाज रात भर भीगता रहा। इस गेहूं के सडऩे की संभावना बन जाएगी। गेहूं की गुणवत्ता पूरी तरह से प्रभावित होने की संभावना बन चुकी है। जो गेहूं खेतों में खड़ी है उसमें जलभराव अधिक नहीं हुआ तो नुकसान कम होगा। किसान हरप्रीत सिंह कलवेहड़ी ने कहा कि यदि अनाज मंडियों में गेहूं मंगवाया होता तो किसानों को अनाज रखने के लिए शैड की सुविधा मिल जाती। बाक्स मार्च में हुए नुकसान का करवाया था आंकलन 13 से 17 मार्च के बीच हुई ओलावृष्टि, बारिश व तेज हवा ने ही किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया था। प्रकृति की मार से गेहूं की फसल को काफी क्षति हुई थी। जिले में 5500 से अधिक किसानों ने फसल खराब को लेकर हुए नुकसान की शिकायत की। नुकसान का सर्वे शुरू होनेे से पहले ही कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन हो गया। जिस कारण समय पर सर्वे शुरू नहीं करवाया जा सका। सरकार के आदेश पर अधिकारियों ने सर्वे कार्य हाल ही में निपटाया और रिपोर्ट तैयार की। कृषि अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि उन्हें नुकसान का मुआवजा जरूर मिलेगा। कोई किसान वंचित नहीं रहेगा। हर शिकायत पर संज्ञान लिया गया और सर्वे करवाकर नुकसान का आंकलन किया गया है। प्रकृति की मार लगातार पड़ रही है। इससे किसानों की कमर टूट जाएगी। बाक्स किसान क्लब के महासचिव विजय कपूर का कहना है कि किसानों के पास अनाज रखने की जगह नहीं। जिन खेतों का गेहूं कंबाइन से कटवाया है उसे खेत में तिरपाल बिछाकर डाला गया है। कुछ किसानों ने पशुबाड़े के बरामदे, घरों में या अन्य ठिकाने देखकर उनमें गेहूं को रखा है। किसानों के लिए इससे मुश्किल की घड़ी कोई नहीं हो सकती। यदि ज्यादा बरसात हुई तो गेहूं की क्वालिटी पर भी फर्क पड़ेगा। मंडियों में अधिकारियों को गेहूं की ढेरी रिजेक्ट करने का बहाना मिल जाता है। जिससे किसान प्रताडि़त होता है।