करनाल। लॉकडाउन के दौरान चारकोल (लकड़ी का कच्चा कोयला) का लघु उद्योग बंद हो जाने के कारण शहर में करीब 300 लोगों की रोजी-रोटी बंद हो गई। यह वर्ग कोरोना वायरस की रोकथाम को लेकर लॉकडाउन की पूरी पालना कर रहा है। 20 अप्रैल से कुछ कार्यों में सशर्त ढील दी जाने वाली है। इसी के चलते इस वर्ग ने भी उन्हें काम करने की इजाजत मांगी है और सोशल डिस्टेंसिंग कायम रखने और सभी नियमों की पालना का वादा किया है। लकड़ी के कोयले की मांग होटल-ढाबों के तंदूर के लिए और धोबी के पास कपड़े प्रेस करने के लिए होती है। होटल-ढाबों व कपड़े प्रेस करने वालों सहित शहर में करीब तीन सौ लोगों को इस कोयले की जरूरत पड़ती थी। आकस्मिक लॉकडाउन के चलते उनका काम बंद हो गया और निर्माता इकाई के पास मांग बंद हो गई। रसूलपुर गांव निवासी प्रवीण प्रजापत की गांव में लकड़ी का कोयला बनाने की लघु इकाई है। यह पंजीकृत फर्म है। प्रवीन कुमार ने जिला प्रशासन से इस रोजगार में ढील देने की अपील की है। इस बाबत उन्होंने रविवार को जिला प्रशासन को आवेदन किया। उन्होंने कहा कि कोयला यूनिट पर पहले भी खरीददार एक-एक करके ही आते थे। पांच से दस किलो कोयला तक ही उनकी मांग होती है। कुछ कामगार अपने व्यवसाय स्थल पर ही डिलीवरी मंगवाते हैं। उनकी प्रशासन से अपील है कि सोशल डिस्टेंसिंग व मास्क लगाने की शर्त के साथ उन्हें भी काम करने की इजाजत दी जाए। ---- कर्मबीर लाठर।