- निजी अस्पतालों के 18 करोड़ बकाया भुगतान न होने पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की जिला कार्यकारिणी ने किया एलान
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले के आयुष्मान पैनल से जुड़े 47 निजी अस्पतालों के 18 करोड़ रुपए सरकार की तरफ अटके हुए हैं। यह भुगतान न होने व कुछ अन्य मांगें पूरी न होने पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की जिला कार्यकारिणी ने एक जुलाई से कार्डधारकों का उपचार नहीं करने का एलान किया है।
ऐसे में जिले के साढ़े सात लाख आयुष्मान कार्ड धारकों को पैनल वाले निजी अस्पतालों में एक जुलाई से कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिलेगी इसको लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की जिला कार्यकारिणी ने सोमवार को उपायुक्त उत्तम सिंह को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बकाया भुगतान के साथ-साथ कुछ मुख्य मांगें पूरी न होने के कारण एक जुलाई से कार्डधारकों का उपचार नहीं करने की बात कही है।
आयुष्मान योजना के तहत कैंसर, हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों के साथ 2200 के करीब दूसरी बीमारियों का सालाना पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज किया जाता है। सरकार के पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में मरीज इलाज तो ले रहे थे लेकिन इसके बदले में लंबे समय से सरकार की तरफ से निजी अस्पतालों को भुगतान नहीं किया जा रहा था।
भुगतान रुकने के अलावा निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के नए मूल्य लागू नहीं होने से भी नाराजगी थी। सरकार की ओर से इलाज के खर्च का भुगतान न किए जाने से निजी अस्पताल संचालकों में रोष है।
रोजाना बढ़ रहा निजी अस्पतालों का बकाया
आईएमए करनाल के प्रधान डॉ. रोहित ने बताया कि सरकार की ओर से पिछले आठ माह से निजी अस्पतालों को भुगतान नहीं किया जा रहा है। ऐसे में निजी अस्पतालों पर रोजाना बोझ बढ़ता जा रहा है। अभी निजी अस्पतालों का लगभग 18 करोड़ रुपए बकाया है। 30 जून तक सरकार उनका बकाया के साथ उनकी मुख्य मांगें नहीं मानती है तो एक जुलाई से पूर्ण रूप से आयुष्मान के तहत इलाज बंद कर दिया जाएगा।
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ये हैं मुख्य मांगें-
- समय पर भुगतान हो और एमओयू की शर्तों के अनुसार जारी किया जाए।
- देरी होने पर एक फीसदी दंडात्मक ब्याज दिया जाए।
- पूर्व-स्वीकृति के बाद कटौती और अस्वीकृतियों को रोका जाए।
- हरियाणा में एचबीपी-2022 पैकेजों का कार्यान्वयन शीघ्र किया जाए।
- टीएमएस-2 पोर्टल में तकनीकी समस्याओं का समाधान हो।
- दस्तावेजीकरण आवश्यकताओं को सरल बनाया जाए ताकि वे बाधा न बनें।
- जुर्माना लगाने की नीतियों को और तार्किक बनाया जाए।
- जांच अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा उत्पीड़न रोका जाए।