एड्स लाइलाज, लेकिन बचाव योग्य बीमारी है। एचआईवी नामक वायरस के संक्रमण से एड्स होता है। असुरक्षित यौन संबंध, अशुद्ध रक्त का चढ़ाया जाना, दूषित सुइयों व सिरिंज का प्रयोग और संक्रमित गर्भवती मां से जन्म लेने वाला बच्चा या स्तनपान कराने से यह बीमारी फैलती है।
स्वास्थ्य विभाग की डिप्टी सीएमओ डॉ. सिम्मी कपूर ने बताया कि एचआईवी संक्रमण को रोकने का एकमात्र तरीका लोगों का जागरूक होना है। लोगों को इसकी उत्पति एवं प्रसार के बारे में बताया जाए। उन्होंने बताया कि इसी बात को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम की शुरूआत की गई। डॉ. सिम्मी कपूर ने बताया कि करनाल जिले के लोग एचआईवी की जांच के लिए आगे आ रहे हैं। जनवरी 2018 से अगस्त 2022 तक 2 लाख 40 हजार 31 लोगों ने एचआईवी की जांच कराई। इनमें 1 लाख 33 हजार 515 महिला व पुरुष और 1 लाख 6 हजार 516 गर्भवती शामिल हैं। इसमें 1,214 एचआईवी पॉजिटिव मिले हैं। जिसमें 1123 महिला व पुरुष, 91 गर्भवती शामिल हैं। डॉ. सिम्मी ने बताया कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन द्वारा टेलीविजन, रेडियो पर नियमित रूप से इस विषय से संबंधित प्रसारण आयोजित किए जाते हैं। पिछले पांच साल में 1157 जागरूकता शिविर लगाएं जा चुके हैं।
इनसे एड्स होने की संभावना
असुरक्षित यौन संबंध, नशीली दवाइयां या नशीले पदार्थ इस्तेमाल करने के लिए इंजेक्शन का प्रयोग, माता या पिता के एचआईवी संक्रमित होने पर पैदा होने वाली संतान को, बिना जांचा या ब्लड बैंक द्वारा बिना सत्यापित किया रक्त चढ़ाने से एड्स हो सकता है। वहीं, एचआईवी संक्रमित से अंगदान लेने और संक्रमित द्वारा इस्तेमाल किया गया ब्लेड व सिरिंज आदि से भी एड्स हो सकता है।
एड्स के लक्षण
प्रथम चरण : बार-बार सिर दर्द, बदन दर्द, ठंड लगना, बुखार होना, शरीर पर दाने और गांठें होना
द्वितीय चरण : लंबी अवधि का बुखार, रात में पसीना आना, दस्त लगना व थकान होना, वजन घटना (3 माह में कम से कम 10 किलो वजन कम होना), स्नायु तंत्र विकार, जीभ पर सफेदी जमना और बार-बार गला खराब होना, गुप्तांगों के पास, गर्दन व जांघों में गिल्टियां होना।
अंतिम चरण : रात में लगातार पसीना आना, थकान व दस्त लगना, वजन घटना व मुंह से खून आना, सांस फूलना, खांसी जो इलाज के बावजूद ठीक न हो, मानसिक परेशानी, चिड़चिड़ापन, मुंह में सफेद छाले होना, शरीर के किसी भी अंग पर बिना दर्द नीले छाले व दाने होना।
पिछले साल की टेस्टिंग और पॉजिटिव मरीजों पर एक नजर
वर्ष जांच पॉजिटिव एएनसी जांच पॉजिटिव
2018 31940 245 33642 30
2019 25736 251 20883 15
2020 27204 208 20688 20
2021 33033 275 22154 24
2022 15602 144 9149 02
कुल 133515 1123 106516 91
वर्जन
एचआईवी के प्रति लोगों का जागरूक होना बहुत जरूरी है, क्योंकि लोगों के जागरूक हुए बिना इस बीमारी से नहीं बचा जा सकता है। लोगों को स्वयं आगे आकर अपना टेस्ट करवाना चाहिए।
- डॉ. सिम्मी कपूर, डिप्टी सीएमओ, स्वास्थ्य विभाग, करनाल