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Karnal News: सावधान! त्योहारी सीजन में मिलावट खोर सक्रिय

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- मिलावटी खाद्य पदार्थों से सेहत को हो सकता है नुकसान, खाद्य सुरक्षा विभाग सतर्क, भरे जा रहे सैंपल
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। त्योहारी सीजन चल रहा है। मिलावट खोर दूध व दूध से बने खाद्य पदार्थों में मिलावट कर रहे हैं। बाजार में लागत से कम दाम में शुद्ध होने के दावे के साथ दूध व दूध से बने खाद्य पदार्थ बिक रहे हैं। जिसको देखते हुए जिला खाद्य सुरक्षा विभाग सतर्क हो गया है। अलग-अलग टीमों की ओर से जिलेभर में सैंपल भरे जा रहे हैं। बता दें कि जुलाई माह से अक्तूबर तक कुल 150 सैंपल लेकर चंडीगढ़ फूड लैब में टेस्टिंग भेजे गए हैं।
सिविल अस्पताल के एमडी फिजिशियन डॉ. कुलबीर सिंह ने बताया कि शुद्ध देसी घी व पनीर का दावा करने वाले वनस्पति घी सहित विभिन्न प्रकार के रसायन का मिश्रण कर रहे हैं। ऐसे में इन्हें खाने से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। मिलावटी दूध व दूध से बनी वस्तुएं खाने से हृदय की बीमारी, उच्च रक्तचाप, लिवर खराब, गर्भपात का खतरा, दिमाग में सूजन, पेट खराब, अपच और अम्लता व कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा बना रहता है। अब तक भेजे गए सैंपलों में मात्र 11 की रिपोर्ट आई है। इनमें सभी सैंपल मानक में खरे नहीं उतरे हैं।
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कैसे होती है मिलावट

दूध में मिलावट का खेल शहरों में धड़ल्ले से चलता है। पनीर बनाने में दूध में वशा न के बराबर होता है। इसके अलावा इसे बनाने के लिए दूध में 40 प्रतिशत तक दुग्ध पाउडर या वनस्पति घी मिलाया जाता है। इसको फाड़कर पनीर और छेना बना लिया जाता है। इस प्रकार की मिलावट करने से पनीर बनाने की लागत बेहद कम हो जाती है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक अगर मिलावटी दूध और इससे बनी वस्तुओं की बिक्री कम नहीं हुई तो देश में कैंसर रोगी बढ़ेंगे। 2025 तक इसमें 87 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है।
किस रसायनयुक्त रंग का क्या नुकसान
औरामिन : सामान्य तौर पर गहरे पीले रंग की मिठाइयों में यह रंग मिलाया जाता है। इसकी सबसे खास पहचान भी यही है। औरामिन शरीर की वृद्धि रोकने के साथ ही लीवर व किडनी को नुकसान पहुंचाता है, हालांकि इसका इस्तेमाल कुछ खास किस्म के फूड प्रोडक्ट बनाने में ही किया जाता है।
मेटारिल येलो : इस रंग का इस्तेमाल लड्डू से लेकर जलेबी व बिरयानी में किया जाता है। इससे पेट, किडनी व लीवर पर सबसे ज्यादा नुकसान होता है। जिससे पेट में इंफेक्शन के साथ ही शरीर में एलर्जी व यूरिन इंफेक्शन भी हो सकता है।
रोडामाइन : मिठाइयों व कुछ खास किस्म के खाद्य पदार्थों को आकर्षक व चमकीला बनाने के लिए इस रंग का इस्तेमाल किया जाता है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को तोड़ता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी कम करता है।
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लेड क्रोमेट : इस रंग का इस्तेमाल कर बनाई जाने वाली मिठाइयों में गहरा पीला रंग दिखाई देता है, जो हमारे शरीर को काफी नुकसान पहुंचाता है, इससे फूड प्वाइजनिंग, पेट में दर्द से लेकर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी इस रंग की मिठाइयां लगातार खाने से होती है।
जिले में त्योहारी सीजन को देखते हुए लगातार खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए जा रहे हैं, जिसमें भी मिलावट मिलती है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है।
डॉ. अमित चौहान, जिला खाद्य सुरक्षा विभाग, करनाल
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