- बटाईदारों के लिए उनके साथ-साथ खेत मालिक का आधार कार्ड अनिवार्य
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। रबी मौसम की गेहूं, आलू आदि कई फसलों के पंजीकरण के लिए मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल खोल दिया गया है, लेकिन इस बार पोर्टल में किए गए कई बदलावों से किसानों को दिक्कतें आ रही है। पोर्टल में इस बार बटाईदार किसानों के साथ-साथ खेत मालिक का भी आधारकार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। जितने खेत मालिक होंगे, उन सभी का अपना वह फोन नंबर पड़ेगा जो आधार कार्ड व बैंक खाते से संबद्ध होगा।
जिले में 2023 में गेहूं का कुल क्षेत्र 515801 एकड़ था, जिसमें 80 प्रतिशत यानी 411396 एकड़ पंजीकृत हो गया था। अब 2024 के लिए गेहूं आदि रबी की सभी प्रमुख फसलों के लिए पंजीकरण शुरू हो गया है। इसके लिए मेरी फसल-मेरा पोर्टल खोल दिया गया है। जिला कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार इस बार पोर्टल में सरकार ने कुछ अहम बदलाव किए हैं। इधर किसानों का कहना है कि जो बदलाव किए हैं वह काफी जटिल हैं, फसल पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाया जाना चाहिए।
ये हैं अहम बदलाव
- इसमें सबसे पहले तो किसान का खुद का मोबाइल फोन नंबर होना चाहिए। यही मोबाइल फोन इसके आधारकार्ड व परिवार पहचान पत्र से भी पंजीकृत होना अनिवार्य है। किसी दूसरे या अपंजीकृत फोन नंबर से पोर्टल पर फसल का पंजीकरण नहीं हो सकेगा।
- जमीन मालिक का आधार कार्ड अवश्य होना चाहिए, जो पंजीकरण करा रहा है, खसरा खतौनी, मुरब्बा आदि के साथ साथ उसका भी मोबाइल फोन नंबर जरूर अंकित करना होगा। ये दोनों फोन नंबर भी आधारकार्ड, परिवार पहचान पत्र से पंजीकृत होना चाहिए।
- एक रकबा की जमीयिदि कई लोगों के नाम है तो वह जमीन के मालिक हुए, उन सभी के आधारकार्ड व उससे लिंक मोबाइल फोन नंबर को भी अंकित करना होगा।
ये हैं दिक्कतें
कई किसान ऐसे हैं जो बटाई या ठेके पर जमीन लेते हैं। जमीन में कई हिस्सेदार हैं, उन सभी के फोन नंबर आधारकार्ड या परिवार पहचान पत्र से संबद्ध नहीं हैं। किसी किसान परिवार में मुखिया का मोबाइल फोन नंबर ही आधार कार्ड या परिवार पहचान पत्र से लिंक नहीं है। किसी किसान का आधारकार्ड या परिवार पहचान पत्र से संबद्ध फोन नंबर बंद हो गया या फिर खो गया है। ऐसे में फसल के पंजीकरण में किसानों को दिक्कतें आ रही हैं।