फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आढ़तियों और मुनीमों ने रखी हड़ताल, ठप रहा मंडियों का कामकाज

विज्ञापन
131-करनाल मंडी से जिला प्रधान रजनीश चौधरी जी की अध्यक्षता सैकड़ों आडती गोहाना की आक्रोश रैली में प?
विज्ञापन
करनाल/घरौंडा। विभिन्न मांगों के समर्थन में अनाज मंडियों के आढ़ती और मुनीम शनिवार को हड़ताल पर रहे। ऐसे में जिले की मंडियों का कामकाज ठप रहा। वहीं शनिवार को गोहाना में हुई आक्रोश रैली में जिले भर से आढ़तियों और मुनीमों ने भी हिस्सा लिया। रैली में निर्णय लिया गया कि यदि 18 सितंबर तक मांगों का समाधान नहीं हुआ तो अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
विज्ञापन

करनाल अनाज मंडी से जिला प्रधान रजनीश चौधरी की अध्यक्षता सैकड़ों आढ़ती गोहाना की आक्रोश रैली में पहुंचे। वहीं मुनीम एसोसिएशन के प्रधान जीत मंडी के सभी मुनीम साथियों सहित रैली में पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी मांगों को अनदेखा कर रही है। घरौंडा अनाज मंडी के प्रधान विनोद जैन ने बताया की प्रदेश सरकार जिस प्रकार से मंडी पर नए कानून थोप रही, वह गलत है। इससे साफ जाहिर है कि प्रदेश सरकार अब मंडियों को बंद करने पर तुली है। उन्होंने कहा कि हड़ताल के बारे में पहले अवगत करवा दिया था ताकि किसानों व आढ़तियों को कोई परेशानी न हो। रैली में करनाल मंडी से दीपक आनंद, राजेश गोयल, पप्पू मित्तल, राकेश चौधरी, शमशेर सिंह,कृष्ण रोड, बगगा सिंह संधू, जोगी राम, रोबिन नरवाल, राजेश अरोड़ा, राज कुमार सिंगला, रिंकू गोयल, तरसेम, राजेंद्र गुप्ता, चंद्र प्रकाश और रणबीर सिंह मौजूद रहे। ब्यूरो
ये हैं मुख्य मांगें
आढ़तियों ने कहा कि ई नेम पोर्टल से फसलों की खरीद-फरोख्त ठीक नहीं है। यह एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया है जिसमें फसलों की खरीद फरोख्त करने में किसान और आढ़ती को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। वहीं आढ़तियों के माध्यम से जो फसल बिक रही है, उन्हें सरकार की तरफ से 2.50 प्रतिशत की पूरी आढ़त मिलनी चाहिए। हरियाणा राज्य में एमएसपी से अलग बिकने वाले माल पर मार्केट फीस और एचआरडीएफ एक प्रतिशत होनी चाहिए। इसके अलावा जो मार्केट कमेटी का लाइसेंस पंजाब में बनाया जाता है, उसी तरह हरियाणा में भी लागू किया जाए। सीमांत किसानों की फसल हरियाणा की मंडियों में बिकनी चाहिए। किसानों के माल की जो पेमेंट होनी है वह किसान से पूछ कर आढ़ती के माध्यम से या किसान के खाते में होनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें