मैंने 19 वर्ष की उम्र में सावन के सोमवार के व्रत करने शुरू किए थे। मेरी मां बताती थीं कि सावन के व्रत या सोलह सोमवार व्रत करने पर अच्छा वर प्राप्त होता है। मुझे याद है मैंने जब पहली बार सावन के व्रत रखे तो वह अलग ही उत्साह हुआ करता था। मैं और मेरी सहेलियां बड़े जोश के साथ व्रत धारण किया करती थीं। सावन माह आने से पहले ही उत्साह रहता था कि अब सभी सहेलियां मिलकर व्रत रखेंगी। सावन के माह में मैं हमेशा अपनी मां से ही मेहंदी लगवाया करती थी। इसके अलावा हमारे गांव में सारी बुजुर्ग महिलाएं एकत्रित होकर सावन और इंद्र देवता के गीतों को गाया करती थीं। सावन में बारिश अधिक होती है, जिसमें इंद्र देवता को मनाने के लिए गीत गाने का भी नियम हुआ करता था। प्रस्तुति- शीला देवी, 66 वर्षीय, वसंत विहार कॉलोनी